देहरादून। नए जिलों के गठन को लेकर प्रदेश के सीएम पुष्कर सिंह धामी के बयान के बाद फिर से सियासत गरमा गई है। 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार डीडीहाट, यमुनोत्री, कोटद्वार और रानीखेत को जिला बनाने का शासनादेश जारी कर चुकी है।
कांग्रेस की सरकार में नए जिलों के गठन का मामला उठा था। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने इसे अपने घोषणापत्र में भी शामिल किया था। हालांकि राज्य के गठन के 21 साल बाद आज तक एक भी नया जिला नहीं बन पाया। इस समय में उत्तराखंड के भीतर दो मंडल, 13, जिले, 110 तहसीलें और 18 उप तहसीलें हैं। जिनको जिला बनाने की मांग की जा रही है उनमें।
कोटद्वार:
15 विकासखंडों वाले पौड़ी जिले की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देख 60 के दशक से कोटद्वार को जिला बनाने की मांग उठ रही है। करीब साढ़े तीन लाख की आबादी वाले इस नगर को जिला बनाने का प्रस्ताव था। जिसमें धुमाकोट, सतपुली, यमकेश्वर और लैंसडौन को शामिल किया जाना प्रस्तावित था।
यमुनोत्री
यमुना घाटी को अलग जिले की मांग 1971 से हो रही है। उस समय पूर्व प्रधानमंत्री स्व0 इंदिरा गांधी उत्तरकाशी दौरे पर पहुंची थी तब से करीब डेढ़ लाख की आबादी पर यमुनोत्री को जिला बनाने का प्रस्ताव बनाया गया था। जिसमें बड़कोट, पुरोला और मोरी को भी शामिल किया जाना था।
रानीखेत
रानीखेत जिले की मांग 1955 से हो रही है। रानीखेत को ब्रिटिश शासक ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की तैयारी में थे। यहां नगर पालिका नहीं है। 1,39,686 हेक्टेयर क्षेत्रफल और साढ़े तीन लाख की आबादी पर इसको जिला बनना था। इसमें सल्ट भिकियासैंण, रानीखेत, द्वाराहाट, स्याल्दे और चौखुटिया शामिल होने थे।
डीडीहाट
डीडीहाट जिले की मांग सन 60 के दशक से उठ रही है। वर्ष 2005 में इसके लिए आंदोलन हुआ। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में इसकी घोषणा की थी। 81304 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर करीब पौने दो लाख आबादी पर जिला बनाया जाना प्रस्तावित था। इसमें धारचूला,डीडीहाट, थल,मुनस्यारी, बंगापानी को शामिल करने का प्रस्ताव था।
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कहना है कि मुख्यमंत्री धामी नए जिलों के गठन को लेकर गंभीर हैं तो वो बधाई के पात्र हैं। नहीं तो भर्ती घोटाले से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह एक शिगूफा है। रावत ने कहा कि हमारी सरकार ने 11 जिलों के प्रस्ताव तैयार किए हैं। तहसीलों और पटवारी हलकों के भी प्रस्ताव तैयार हैं। हम चूक गए थे लेकिन धामी के सामने सिकंदर बनने का मौका है। उनको नहीं चूकना चाहिए।

