ब्लैक टॉप पर है चीन की नजर

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ब्लैक टॉप पर है चीन की नजर

पूर्वी लद्दाख के चुशूल में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने
ब्लैक टॉप की ऊंचाई से करीब 100 मीटर नीचे चीनी टैंक साफ देखे जा सकते हैं

ब्लैक टॉप पर चीन की नजर है.देर रात यहीं से चीनी सैनिकों ने घुसपैठ की कोशिश की.जम्मू-कश्मीर के पूर्वी लद्दाख के चुशूल में भारत और चीन के सैनिक फिर से आमने-सामने हैं. चीन की ओर से वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर तीन बार घुसपैठ की नाकाम कोशिशों के बाद हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. ब्रिगेडियर कमांडर स्तर की बातचीत के बीच चीनी सैनिकों ने 29-20 अगस्त की रात, फिर 31 अगस्त की रात और 1 अगस्त को लद्दाख में तीन जगहों पर हिमाकत दिखाई. हर बार उसे नाकामी हासिल हुई.

टी-90 से मात दे रही सेना
भारतीय सेना के स्पेशल कमांडोज ने दक्षिण पैंगॉन्ग झील के पास ब्लैक टॉप की पहाड़ियों को अपने कब्जे में ले लिया है. वहीं, चीनी सेना को जवाब देने के लिए पैंगॉन्ग झील के दक्षिण छोर पर ब्लैक टॉप के इलाके में भारतीय सेना ने टी-90 टैंक की रेजिमेंट एक्टिव कर दी है. जबकि, चीन ने पहाड़ों पर लड़ने वाले हल्के टैंक टी-15 को लद्दाख में खास तौर पर तैनात किया है. भारतीय सेना के पास जो टी-90 युद्धक टैंक हैं. वो युद्धभूमि में बेजोड़ है.

क्यों अहम है ब्लैक टॉप?
ताजा विवाद जो हुआ है वो पैंगोंग झील के दक्षिणी हिस्से में है. यह विवादित एरिया ब्लैक टॉप पहाड़ी के नजदीक है, जो चुशूल से 25 किमी पूर्व में है. ब्लैक टॉप पर हालांकि चीन का नियंत्रण है. लेकिन यहां भारतीय सेना की मौजूदगी ने उसे परेशान कर दिया है. ब्लैक टॉप की ऊंचाई से करीब 100 मीटर नीचे चीनी टैंक साफ देखे जा सकते हैं. चीनी सेना ने इन्हें किसी भी एक्शन के लिए बिल्कुल तैयार रखा है. वहीं, भारतीय सेना एंटी टैंक मिसाइल स्पाइक सिस्टम से लैस है यानी इशारा मिलते ही टी-15 टैंक खाक में मिला दिए जाएंगे.

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