अमित बिश्नोई
- कोराेना वायरस को दुनियाभर में भी चीन की भूमिका को लेकर नाराज है कई कंट्री
- हांगकांग में विवावित कानून को लेकर कई देशों के साथ भारत ने उठाए सवाल
कोविड-19 के आउटब्रेक में चीन की भूमिका को लेकर दुनियाभर के देश नाजार है. अब चीन एक दूसरे मुद्दे पर भी घिर गया है. दरअसल, चीन ने हांगकांग को लेकर एक कानून पास किया है. जिसके बाद दुनियाभर के देशों ने चीन पर मानवाधिकारों के हनन के साथ अन्य आरोप लगाए है. इस कानून को लेकर हांगकांग में करीब दो साल से विरोध चल रहा है. कई देशों के बाद अब भारत ने भी इस कानून पर सवाल उठाए हैं.ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ने इस कानून को लेकर चीन को जमकर तलाड़ लगाई थी. उन्होंने कहा कि ये कानून अधिकारों और स्वतंत्रता पर खतरा है. बोरिस जॉनसन ने ब्रिटिश संसद में कहा कि,“इस राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करना और लोगों पर लादना चीन-ब्रिटेन संयुक्त घोषणा पत्र का गंभीर उल्लंघन है. ये हॉन्ग कॉन्ग के मूल कानूनों के खिलाफ है और उसे मिली स्वायत्ता का उल्लंघन करता है.”अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस विवादित कानून पर अपनी नाराजगी जता चुके हैं. अमेरिका ने कहा कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का ये कानून एकतरफा और मनमाने तरीके से लागू किया जा रहा है. यूएस ने बीजिंग को अपने इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने और हॉन्ग कॉन्ग की स्वायत्ता को बचाए रखने को कहा है.
भारत ने यूएनएचआरसी में घेरा
भारत ने बुधवार को यूएनएचआरसी में कहा कि हॉन्ग कॉन्ग को स्पेशल एडमिनिस्ट्रेटिव रीजन बनाना और इसके लिए कानून लाना चीन का घरेलू मसला है, लेकिन भारत घटनाओं पर नजर रखे हुए है. जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजीव चंदर ने कहा,“हम हाल ही में हॉन्ग कॉन्ग में हुई घटनाओं को लेकर कई बयान सुन चुके हैं. जो काफी चिंताजनक हैं. हम उम्मीद करते हैं कि संबंधित पक्ष (चीन) इन सभी बातों का खयाल रखेगा और इसका उचित और निष्पक्ष सामाधान करेगा.”
यूएनएचआरसी लगा चुका है फटकार
यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट काउंसिल (यूएनएचआरसी) भी चीन को हॉन्ग कॉन्ग मामले पर फटकार लगा चुका है. यूएनएचआरसी ने चीन की पीपुल्स रिपब्लिक सरकार को कहा कि, यूनाटेड नेशंस के स्वतंत्र विशेषज्ञों ने कई बार आपसे संपर्क किया, ताकि चीन में हो रहा मौलिक स्वतंत्रता का दमन रोका जा सके. लेकिन इसके बाद भी कुछ कार्रवाई नहीं हुई. यूएनएचआरसी ने कहा कि यहां चीन की तरफ से पुलिस फोर्स का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया गया और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केमिकल एजेंट्स का इस्तेमाल भी किया गया.
यह कानून क्यों विवादों में?
इस कानून को पारित करने के लिए हांगकांग की विभाजित विधायिका को नजरअंदाज कर दिया गया और इसकी शब्दावली को शहर के 75 लाख नागरिकों से गुप्त रखा गया.चीन का राष्ट्रीय सुरक्षा कानून हांगकांग में सुपर कानून के रूप में होगा. इस पर हांगकांग सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा. इस कानून में स्पष्ट किया गया है कि इस कानून को लागू करवाने में हांगकांग सरकार या उसके कर्मचारियों का कोई रोल नहीं होगा. इसे हांगकांग सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया है.स्पष्ट है कि हांगकांग में यह एक सुपर कानून की तरह काम करेगा. कानून में कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जब लोग अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे होंगे तो इस पर हांगकांग सरकार को कोई नियंत्रण नहीं होगा. राष्ट्रीय सुरक्षा कानून से जुड़े स्टाफ हांगकांग सरकार के नियंत्रण में नहीं रहेंगे. हांगकांग के किसी भी शख्स को चीन सजा दे सकेगा.

