Chandrayaan-3: चांद की सतह से मात्र 113 किमी दूर अपना Chandrayaan-3, पहली डीबूस्टिंग सफल

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Chandrayaan-3: अपना Chandrayaan-3 सधे कदमों से चांद की ओर बढ़ रहा है। Chandrayaan-3 की पहली सफल डीबूस्टिंग के बाद लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान वाला पूरा माॅड्यूल अब चांद से 157 किमी की दूरी वाली कक्षा पर पहुंच गया है। दूसरी डीबूस्टिंग 19-20 अगस्त की रात दो बजे होगी। इसके बाद 23 अगस्त को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर Chandrayaan-3 की सॉफ्ट लैंडिंग होगी।
Chandrayaan-3 के लैंडर मॉड्यूल की रफ्तार धीमी (डीबूस्टिंग) करने की पहली प्रक्रिया सफल हुई है। अब Chandrayaan-3 चांद से महज 113 किमी की दूरी पर है। इसरो ने बताया कि Chandrayaan-3 के लैंडर मॉड्यूल पूरी तरह से काम कर रहे हैं। उस पर लगे कैमरे ने चांद के करीब से खींचे कई मनोरम चित्र भेजे हैं।

Chandrayaan-3 की पहली सफल डीबूस्टिंग के बाद लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान वाला माॅड्यूल रात में चांद से अधिकतम 150 किमी की दूरी वाली कक्षा पर था। दूसरी डीबूस्टिंग 19-20 अगस्त की रात दो बजे होगी। 23 अगस्त को Chandrayaan-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। लैंडर 35 दिन की अंतरिक्ष यात्रा के बाद गुरुवार को प्रोपल्शन मॉड्यूल से अलग हुआ था।

सॉफ्ट लैंडिंग के बाद निकलेगा रोवर

Chandrayaan-3 के सॉफ्ट लैंडिंग बाद छह पहियों वाला रोवर प्रज्ञान विक्रम से बाहर निकलेगा। यह एक चंद्र दिवस (धरती के 14 दिन) की अवधि तक सतह पर कई प्रयोग करेगा। 100 मीटर की ऊंचाई से सतह को स्कैन करेगा फिर साॅफ्ट लैंडिंग करेगा Chandrayaan-3।
इसरो के अनुसार , चांद से 30 किमी की ऊंचाई पर, लैंडर पावर्ड ब्रेकिंग चरण में प्रवेश करेगा। इसके बाद चंद्रमा की सतह तक पहुंचने के लिए अपने थ्रस्टर्स का उपयोग शुरू कर देगा। लगभग 100 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचने पर लैंडर सतह को स्कैन करेगा और देखेगा कि कहीं बाधा तो नहीं है। उसके बाद सॉफ्ट लैंडिंग के लिए नीचे उतरना शुरू कर देगा।

तस्वीरों में साफ दिख रहे चांद के गड्डे

इसराे ने Chandrayaan-3 से भेजी चांद के करीब से ली तस्वीरों का सीक्वेंस जारी किया। लैंडर मॉड्यूल पर लगे कैमरे ने 15 अगस्त को इन तस्वीरों को खींचा। इन तस्वीरों में चांद की सतह पर मौजूद गड्डे साफ दिखाई दे रहे हैं। इसरो ने इन क्रेटर्स को ‘फैब्री’, ‘हारखेबी जे’ व ‘जियोर्डानो ब्रूनो’ के रूप में दिखाया है। कुछ तस्वीरें lander module के propulsion module से अलग होने के बाद खींची हैं।

देश को बड़े रॉकेटों की जरूरत

पूर्व इसरो प्रमुख के सीवन ने कहा कि अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत किफायती इंजीनियरिंग के भरोसे नहीं रह सकता। देश को बड़े रॉकेटों की जरूरत है और इसके लिए अंतरिक्ष क्षेत्र में निवेश करना होगा।

लूना मिशन 11 दिन में चांद के करीब

किफायती तकनीक के जरिए भेजे गए चंद्रयान—3 ने 14 जुलाई को उड़ान भरी थी। वह 23 अगस्त को चंद्रमा की सतह पर पहुंचेगा। वहीं, रूस का लूना मिशन 10 अगस्त को लॉन्च हुआ था। वह अपने बड़े केट के जरिये सिर्फ 11 दिन बाद 21 अगस्त को चंद्रमा पर उतर सकता है।

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