Chandrayaan 3 Launch: चंद्रयान-3 आज दोपहर ढाई बजे श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया जाएगा। अगसत 23-24 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग सफल होती है तो भारत दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बनेगा।
क्या है चंद्रयान-3 मिशन?
चंद्रयान-3 मिशन, चंद्रयान-2 का अगला चरण है। जो चंद्रमा की सतह पर उतरकर परीक्षण करेगा। इसमें प्रणोदन मॉड्यूल, एक लैंडर और एक रोवर है। चंद्रयान-3 का फोकस चंद्रमा सतह पर सुरक्षित लैंड करने पर है। मिशन की सफलता के लिए इसमें नए उपकरण बनाए हैं। एल्गोरिदम को बेहतर किया है। जिन कारण से चंद्रयान-2 मिशन चंद्रमा की सतह पर नहीं उतर पाया था। उन कमियों को दूर किया गया है।
अंतरिक्ष क्षेत्र के कारोबार में भारत की हिस्सेदारी
इसरो वैज्ञानिक नंबी नारायणन ने कहा कि अगर चंद्रयान-3 सफलता से चंद्रमा पर उतरा तो भारत को अंतरिक्ष क्षेत्र के कारोबार के हिस्सेदार में अपनी बढत बनाने का मौका मिलेगा। इस समय 60 हजार करोड़ डॉलर के आंके जा रहे कारोबार में भारत का हिस्सा महज 2 प्रतिशत है। इसके आगे बढ़ने की संभावना होगी।
मिशन मुश्किल, सफलता जरूरी
चंद्रयान-3 के सफल होने की अपेक्षा जताते हुए इसरो के पूर्व अध्यक्ष माधवन नायर ने कहा कि मिशन अंतरिक्ष अध्ययन क्षेत्र में भारत के लिए मील का पत्थर बनेगा। उन्होंने कहा कि चंद्रमा पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग बेहद मुश्किल और जटिल होती है। उन्होंने कहा मिशन की सफलता भारत के लिए जरूरी है।
सॉफ्ट लैंडिंग की क्षमता साबित करेंगे
भारत के मून-मैन व चंद्रयान-1 मिशन डायरेक्टर डॉ. मायलस्वामी अन्नादुरई ने चंद्रयान-3 को बेहद खास मिशन बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने चंद्रमा के परिक्रमा पथ को लेकर तकनीकी क्षमता साबित की है। अब सॉफ्ट लैंडिंग की क्षमता उसको साबित करनी है। आज पूरी दुनिया फिर से चांद को देख रही है। यह मिशन हर हाल में सफल बनाना ही है। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान चंद्रमा सतह पर एक दिन में 14 पृथ्वी दिवस के बराबर काम व परीक्षण करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह समय चंद्रमा के एक दिन के बराबर होता है।
इसरो के पूर्व निदेशक के सिवन ने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता भारत के प्रमुख मिशन गगनयान को भी हौसला देगी। उन्हीं के कार्यकाल में 2019 में चंद्रयान-2 मिशन भेजा था। जिसमें लैंडर को चंद्रमा पर उतारने में सफलता नहीं मिल सकी थी। उन्होंने कहा कि इसरो ने विफलता की वजह बनी चीजों काे फिर से तैयार किया। जिससे इसमें काफी सुधार किया गया है। इस बार निश्चित सफलता मिलेगी। सिवन ने कहा चंद्रयान-3 के सामने पिछले मिशन जैसी चुनौतियां हैं। लेकिन अंतरिक्ष में कई चीजें अज्ञात रहती हैं। गलतियों से सीख लेकर नया आत्मविश्वास पाया है। उम्मीद है कि इस बार मिली सफलता भावी पीढ़ियों के लिए लाभकारी साबित होगी।

