मेरठ। Uttar Pradesh Assemble Election| आगामी 20 फरवरी को प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2022 के तीसरे चरण का मतदान होगा। कई लिहाज ये ये तीसरा चरण काफी चुनौतीपूर्ण और अहम माना जा रहा है। जहां इस तीसरे चरण में भाजपा के सामने प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है वहीं सपा के सामने भी अपना राजनैतिक वजूद बचाने का सवाल है। चुनाव का यह तीसरा चरण तीन हिस्सों में बंटा हुआ है। जिसमें पश्चिमी उप्र,बुदेंलखंड के साथ ही अवध का भी कुछ हिस्सा इसमें आ रहा है। इन तीनों ही इलाकों में चुनाव तपिश से राजनैतिम गर्मी बढ़ने लगी है। इस चुनाव में आगामी 20 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, कासगंज और हाथरस जिलों की 19 सीटों पर मतदान होगा। जबकि बुंदेलखंड के झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर,महोबा जिलों की 13 विस सीटों के लिए वोट डाले जाएंगे। वहीं अवध क्षेत्र की बात करें तो इसके छह जिलों यानी कानपुर और कानपुर देहात के अलवा औरैया,कन्नौज,फर्रुखाबाद और इटावा की 27 सीटों के लिए मतदान शुरू होगा।
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इस तीसरे चरण के भाजपा के सामने 2017 का प्रदर्शन दोहराने की चुनौती है। 2017 के चुनाव में भाजपा ने इस क्षेत्रों की 59 में से 49 विस सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस तीसरे चरण में 59 सीटों में से 30 पर यादव वोट की बहुलता है। 2017 में भाजपा यादव वोटों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब हो गई थी। जिसके बाद सपा औघे मुंह गिरी थी। सपा ने इस बार यादव वोटों को एक जगह करने की पूरी कोशिश की है। अखिलेश यादव यादव वोटों के ध्रुवीकरण केा रोकने के लिए खुद मैनपुरी के करहल सीट से प्रत्याशी बने हैं। चुनावी दंगल में एक बार फिर से मुसलमान के अलावा दंगे और अपराधीकरण के भाषण दिए गए हैं। वहीं इसी के साथ जातीय समीकरण को भी साधने की पूरी कोशिश की गई है। मुस्लिम महिलाओं के वोट को लेकर भी विपक्ष और भाजपा में जोर अजमाइश चल रही है। मतदान शुरू होने में अब 24 घंटे से भी कम का समय बचा है। ऐसे में देखना है कि मतदाताओं को अपने पक्ष में कौन सा दल इन घंटों में कर पाता है।

