Uniform Civil Code: 2024 चुनाव से पहले मॉडल कानून लागू करने की तैयारी में सरकार

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार 2024 चुनाव से पहले समान नागरिक संहिता को पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए देसाई कमेटी रिपोर्ट का इंतजार है। वहीं रिपोर्ट पेश करने से पहले बैठकों का अंतिम चरण जारी है।
राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 खत्म करने संबंधी अपने दो अहम वादे निभा चुकी भाजपा अब आगामी लोकसभा चुनाव 2024 से पहले अपनी विचारधारा से जुड़ा तीसरा वादा पूरा करने की तैयारी में है। देश भर में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए सरकार और विधि आयोग को उत्तराखंड सरकार द्वारा जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में गठित कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है।
सरकार इसी रिपोर्ट के आधार पर समान नागरिक संहिता को देश में लागू करने के लिए मॉडल कानून बनाने की तैयारी में है।

ढाई लाख सुझावों का किया अध्ययन

कमेटी ने इस संदर्भ में मिले करीब ढाई लाख सुझावों का अध्ययन किया है। इसके अलावा करीब सभी हितधारकों से संवाद के बाद कमेटी रिपोर्ट को अंतिम रूप देने को बैठकें कर रही हैं। उम्मीद है कि कमेटी मई या जून के मध्य तक रिपोर्ट पेश कर देगी।

गुजरात-मध्यप्रदेश को रिपोर्ट का इंतजार

उत्तराखंड की तर्ज पर गुजरात और मध्यप्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता लागू करने का वादा किया है। केंद्र सरकार की तरह इन दो राज्य सरकारों को भी जस्टिस रंजना कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार है। समान नागरिक संहिता कानून पर गुजरात कैबिनेट मुहर भी लगा चुकी है।

भाजपा इस मामले में जनसंख्या नियंत्रण कानून की तर्ज पर कदम उठाने की तैयारी में है। गौरतलब है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पहले पार्टी शासित राज्यों असम और उत्तर प्रदेश ने कदम उठाए। इसके बाद कई और पार्टीशासित राज्यों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। सूत्रों का कहना है कि समान नागरिक संहिता मामले में भी भाजपा यही रणनीति अपना सकती है। इसके तहत पहले कुछ राज्य इसे लागू करें और बाद में इसे पूरे देश में लागू किया जाए।

भाजपा विचारधारा से जुड़े राम मंदिर और अनुच्छेद 370 की राह में कई कानूनी अड़चनें थी, मगर समान नागरिक संहिता मामले में ऐसा नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से ले कर कई राज्यों के हाईकोर्ट ने कई बार इसकी जरूरत बताई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी। इसी संदर्भ में केंद्र सरकार ने भी शीर्ष अदालत में कहा था कि वह समान कानून के पक्ष में है। संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित नीति निर्देशक सिद्धांतों में समान नागरिक संहिता की वकालत की गई है।

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