चुनाव आते ही सबसे ज़्यादा सुगबुगाहट जिस बात की होती है वो है पेट्रोल-डीज़ल के दाम. हर तरफ चर्चा होने लगती है कि दाम कम होने वाले हैं. लेकिन क्या वाकई मोदी सरकार ऐसा कुछ करने जा रही है, विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा होने की ज़्यादा सम्भावना है. इस समय अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड आयल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल के आसापास है. कुछ दिन पहले तो ये 75 डॉलर प्रति बैरल से भी कम थे. इंडियन बास्केट की बात करें तो 80 डॉलर प्रति बैरल से कम ही देखने को मिली है्. ऐसे में दाम में कमी की जाय तो कोई हैरत वाली बात नहीं होनी चाहिए।
दरअसल देश में मंहगाई चरम सीमा पर है और इसका एक बड़ा कारण पेट्रोल-डीज़ल के ऊंचे दाम हैं जो मंहगाई को बढ़ाने में सीधा प्रभाव डालते हैं. चुनाव के मौके पर तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे नरेंद्र मोदी लोगों को मंहगाई से मामूली सी राहत देने के लिए पेट्रोल और डीज़ल के दामों में थोड़ी कमी कर सकते है, जो दस रूपये तक हो सकती है. हालाँकि भाजपा ने आज ही एक कैम्पेन लांच किया है जिसमें कहा गया है कि मोदी जी के बार बार चुने जाने की वजह ये है कि सपने न तो देखते हैं और न ही दिखाते है, वो हकीकत में यकीन रखते हैं और हर काम को हकीकत का रूप देते हैं. तो पेट्रोल-डीज़ल के दाम कम करने के सपने को भी प्रधानमंत्री हकीकत का रूप दे सकते हैं.
इस समय तेल की मार्केटिंग करने वाली सरकारी कंपनियां बाजार के 90 फीसदी हिस्से को कंट्रोल करती हैं, पिछले बरस सितंबर के बाद से तेल की कीमतों में तेज गिरावट की वजह से खूब मुनाफा बना रही हैं। इस तेज गिरावट ने मार्केटिंग मार्जिन को पेट्रोल 11 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर डीजल पर 6 रुपये प्रति लीटर बढा दिया है. आंकड़ों से पता चलता है कि इंटरनेशनल मार्केट में तेल की कीमतें अनुकूल बनी हुई हैं। खास बात तो ये है मई तक नई सरकार का गठन हो चुका होगा और नई सरकार के पास अगले 12 महीनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को और कम करने का भी मौका होगा. ब्रेंट क्रूड की बात करें तो गुरूवार को 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। ऑयल मार्केटिंग कपंनियों के प्रॉफिट में आने की प्रमुख वजह बीते कई महीने से कच्चे तेल के दाम 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहना है.

