बाजार:- निजीकरण को लेकर सरकार काफी तेजी से कार्यरत हैं सरकार निरंतर कोशिश में लगी है निजीकरण के द्वारा घाटे में चल रही सरकारी कम्पनियों को कैसे लाभ प्राप्त करवाया जाए। वही अब ख़बर है कि उर्वरक, कपड़ा, रसायन और पेट्रोकेमिकल, फार्मास्यूटिकल्स और वाणिज्य मंत्रालयों के तहत 60 केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के निजीकरण या बंद करने के लिए प्रारंभिक सूची में शामिल होने की संभावना है। इसके लिए सरकार गैर-रणनीतिक क्षेत्रों में उद्यम (पीएसई) नीति लागू करने की तैयारी कर रही है।
सूत्रों का कहना है कि गैर-रणनीतिक क्षेत्र में लगभग 175 सीपीएसई हैं जिनमें से एक-तिहाई बन्द हो जाएंगे और जो बचेंगी उनका निजीकरण कर दिया जायेगा। जबकि कुछ गैर-लाभकारी कंपनियों को सार्वजनिक क्षेत्र में रखा जाएगा। जिनका सार्वजनिक उपक्रम नीति के अनुसार निजीकरण या बंद किया जाएगा। वित्त वर्ष 2022-23 के बजट में रणनीतिक क्षेत्र की नीति का अनावरण किया गया है जिसमें कहा गया है कि सरकार की चार व्यापक क्षेत्रों में न्यूनतम उपस्थिति है, जबकि शेष का निजीकरण या विलय या बंद किया जा सकता है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मद्रास फर्टिलाइजर्स और नेशनल फर्टिलाइजर्स सहित उर्वरक मंत्रालय के तहत सभी नौ सीपीएसई का निजीकरण किए जाने की संभावना है। देश द्वारा बड़े पैमाने पर उर्वरक आयात को देखते हुए, सरकार हाल के वर्षों में घरेलू विनिर्माण को बढ़ाने की कोशिश कर रही है और ये कंपनियां उत्पादों के लिए कैप्टिव बाजार को देखते हुए निजी क्षेत्र के लिए आकर्षक हो सकती हैं।

