बुरहानपुर, जहां की यात्रा अनोखा अनुभव करवाती है | यहां मुगल बादशाह शाहजहां की प्रिय बेगम मुमताज महल का देहांत भी यहीं हुआ था। ऐसा माना जाता है की यहां के काले ताजमहल से प्रेरणा लेते हुए ही आगरा में ताजमहल का निर्माण कराया गया।
ऐसा भी माना जाता है की भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल में ताप्ती तट के जितने क्षेत्र में भ्रमण किया, उतने प्रदेश को रामक्षेत्र कहा गया हैं। यहां पर श्रीराम ने अपने पिता महाराज दशरथ का पिंडदान भी किया और शिवलिंग की स्थापना भी की। अभी वर्तमान में नागझिरी घाट कहलाता है, यहां 12 शिव मंदिर हैं, जिन्हें द्वादश ज्योतिर्लिंग का स्वरूप माना जाता है। यहां श्रीराम झरोखा मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण, जानकी की प्रतिमा वनवासी रूप में विद्यमान है।
प्राचीन समय में यह शहर जैन नगरी के रूप में भी जाना जाता था, और इसी जगह में भगवान प्रार्श्वनाथ का मंदिर अपनी उत्कृष्टता के लिए प्रसिद्ध था। लेकिन 1857 ई. में घटित भयानक अग्निकांड में यह मंदिर पूरी तरह जल गया था, उसके बाद नए मंदिर का निर्माण किया गया।
बुरहानपुर शहर सिख समाज का भी धार्मिक पर्यटन स्थल रहा है, यहां सिखों के प्रथम श्री गुरु नानकदेव जी महाराज एवं दसवें श्री गुरु गोविंद सिंह जी महाराज पधारे थे | यहां पर राजघाट और लोधीपुरा में बड़ा गुरुद्वारा स्थित है, जहां प्रतिवर्ष हजारों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। ये अमृतसर से नांदेड़ के बीच सिख समाज का एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान है।

