लखनऊ : चौक में शनिवार सुबह 7 बजे जब आरके रस्तोगी सो कर उठे तो उनके पास की दुकान हाउस टैक्स के बकाया पर सील कर दी गई थी। उन्होंने देखा कि पास में ही नगर निगम की टीम (Municipal team) बाजार की अन्य दुकानों को सील कर रही थी और वहां नोटिस चस्पा कर रही थी। दरअसल यह केवल एक मामला नहीं है। पिछले 3 दिन से जब लोग सो कर उठते हैं क्या दोपहर 12 बजे दुकान खोलने जाते हैं तो पता चलता है कि हाउस टैक्स का बकाया होने पर उनकी दुकान को नगर निगम की टीम ने सील कर दिया है। बकायेदारों से पैसा वसूलने का नगर निगम नया नया तरीका निकाला है। पिछले 3 दिन में करीब 600 से ज्यादा लोगों की दुकानें सील की गई। बड़ी बात यह है कि इसमें से 80 % सीलिंग की कार्रवाई सुबह 7 से दोपहर 12 बजे तक कर दी गई है।

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भीड़ परेशान न करें इसके लिए ऐसे काम कर रहे हैं कर्मचारी

नगर निगम में पिछले तीन दशक पर तैनात एक कर्मचारी ने बताया कि पुराने लखनऊ में खासकर अमीनाबाद चौक समेत कई इलाकों में अगर दोपहर में अब कार्रवाई करने के लिए जाते हैं तो वहां भीड़ कर्मचारियों को घेर लेती है। स कई बार अराजक लोग नगर निगम कर्मचारियों (Municipal employees) को ही दौरा लेते है। उसके अलावा अपने रसूख का इस्तेमाल कर कार्रवाई नहीं होने होने देते हैं। ऐसे में तय किया गया है कि दुकान खुलने और लोगों के जगने से पहले ही नोटिस चश्मा कर सीलिंग की कार्रवाई कर दी जाए।

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60% लोग नहीं जमा करते हाउस टैक्स

लखनऊ नगर निगम (Lucknow Municipal Corporation) के आंकड़ों के अनुसार मौजूदा समय प्याज और मूलधन को मिलाकर करीब 900 करोड रुपए से ज्यादा का बकाया है। स्थिति यह है कि तमाम अभियान चलाने के बाद भी शहर में 60% लोग अपना हाउस टैक्स बिल नियमित जमा नहीं करते हैं। जबकि मौजूदा समय लखनऊ नगर निगम पर 300 करोड़ रुपए से ज्यादा की लायबिलिटी है। केवल ₹580000000 तो रिटायर कर्मचारियों का देना है। इसमें उनके पीए से लेकर तमाम मंद का बकाया है।

