Breaking News: रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर सरकार को आड़े हाथ लेंगे कर्मचारी

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Breaking News: रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर सरकार को आड़े हाथ लेंगे कर्मचारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के 200 से ज्यादा विभागों में खाली पड़े 400000 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के रिक्त पदों को लेकर कर्मचारी संगठन सरकार को आड़े हाथ लेने की तैयारी कर रहे हैं। 10 मार्च के बाद जो भी सरकार आएगी उनको कर्मचारी संगठनों का बड़ा विरोध झेलना होगा। उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ (Uttar Pradesh Class IV Employees Federation) ने इसको लेकर प्रदेश के सभी छोटे बड़े विभागों से डाटा एकत्र करना शुरू कर दिया है। इसमें यह आंकड़ा एकत्र किया जा रहा है कि संबंधित विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के कितने पद स्वीकृत हैं और कितने पद खाली हैं।

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उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ (Uttar Pradesh Class IV Employees Federation) के अध्यक्ष रामराज दुबे ने बताया कि पिछले दो दशक से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की कोई नियुक्ति नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर विभागों में आउटसोर्सिंग और संविदा से काम कराया जा रहा है। इसमें कर्मचारी को 8000 से लेकर ₹14000 तक का वेतन मिलता है। उसमें भी आउटसोर्सिंग कंपनियों के मालिक कर्मचारियों का पैसा मार जाते हैं। स्थिति या एक लोक निर्माण विभाग में छह महीने तक कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता है। उन्होंने बताया कि 10 मार्च के बाद कर्मचारी संगठन एक संयुक्त बैठक करेंगे और सरकार के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उसके बाद भी मांगों पर कोई सुनवाई नहीं होती है तो 1986 की तरह प्रदेश में बड़ा कर्मचारी आंदोलन खड़ा किया जाएगा।

महासंघ के महासचिव सुरेश सिंह यादव ने कहा कि हाई कोर्ट भी कह चुका है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों से काम लेने पर विभाग की गोपनीयता को खतरा है। कोर्ट ने आदेश जारी किया था कि नियमित भर्ती की जाए। उसके बाद कार्मिक विभाग की तरफ से सभी विभागाध्यक्ष व को पत्र लिखा गया था और जरूरत के हिसाब से कर्मचारियों की नियुक्ति करने को कहा गया था। हालांकि पत्र का कोई असर नहीं हुआ और किसी भी विभाग में कोई नियुक्ति नहीं हुई।

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कर्मचारी संगठनों की दलील है कि संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को पीएफ से लेकर पेंशन और तमाम सुविधाएं नहीं मिलने वाली है। क्या लावा इसमें अधिकतम वेतन 14 से ₹15000 तक मिलता है जबकि नियमित कर्मचारी का न्यूनतम वेतन 26 हजार से लेकर ₹50000 तक हो जाता है। उसके अलावा मेडिकल समेत तमाम सुविधा है उसको उपलब्ध रहती है जो आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों को नहीं मिलती है। संविदा और आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारियों का शोषण होता है।

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