Booker Prize: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छायी हिंदी, टॉम्ब ऑफ सैंड ने रचा इतिहास

इंटरनेशनलBooker Prize: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छायी हिंदी, टॉम्ब ऑफ सैंड ने रचा...

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कल रात से हिंदी की चर्चा पूरे विश्व में हो रही है, वहीं इंटरनेट की दुनिया में बुकर पुरस्कार पाये उपन्यास को लोग खोजने में जुटे हुये हैं। जानकारी के अनुसार हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका गीतांजलि श्री के उपन्यास टॉम्ब ऑफ सैंड के लिये अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार से नवाजा गया है। दूसरी ओर यह उनके हिंदी उपन्यास रेत समाधि का अंग्रेजी अनुवाद है, जिसे पूरे विश्व में सराहना मिली है। जानकारी के अनुसार इसका अनुवाद डेजी रॉकवेल ने किया है, इसके साथ ही उपन्यास बुकर पुरस्कार के इतिहास में सम्मानित पहला हिंदी उपन्यास है, जिसने पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा दिया है।

दूसरी ओर इस उपन्यास को यह पुरस्कार मिलना पूरे भारत के लिये गौरव की बात माना जा रहा है, इसके साथ ही इस पुरस्कार को मिलने से पूरी हिंदी पट्टी गौरान्वित महसूस कर रही है। बता दें कि बुकर पुरस्कार उसे प्रदान किया जाता है, जिसका प्रकाशन यूके या आयरलैंड में हुआ हो। इसके साथ ही इस पुरस्कार को पाने वाले को 50 हजार पाउंड का नकद पुरस्कार सम्मान स्वरूप दिया जाता है, वहीं यह राशि लेखक और अनुवादक के बीच विभाजित हो जाती है। बात करें अगर इस उपन्यास के बारें में तो यह विभाजन की कहानियों को बेहतर तरीके से कहता है, इसमें एक महिला को केंद्र में रखकर समस्याओं का ताना-बाना बुना गया है।

वहीं 80 वर्षीय महिला का पति काल-कलवित हो जाता है, जिसके बाद महिला को गहरे अवसाद का सामना करना पड़ता है। इसके बाद महिला कुछ दिनों बाद अपने जीवन में फिर से नये रंग लाने की कोशिश करती है, जहाँ उसे तमाम उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर इस पुरस्कार के मिलने पर गीतांजलि श्री ने कहा कि यह मेरे लिये व्यक्तिगत तौर पर नहीं है, इसके साथ ही मैं एक भाषा और संस्कृति का प्रतिनिधित्व भी करती हूँ, जिसका मुझे गर्व है।

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