उत्तर प्रदेश में मिल चुके हैं ब्लैक फंगस के 78 केस
वाराणसी में ब्लैक फंगस के 23 मरीज मिलने से दहशत
मेरठ में भी ब्लैक फंगस का कहर, 2 की मौत, 10 मरीज अस्पतालों में भर्ती
न्यूज डेस्क। कोरोना संक्रमण के कारण बेहाल हो चुके उत्तर प्रदेश पर अब ब्लैक फंगस इंफेक्शन की काली छाया पड़ गयी हैै। प्रदेश में अब तब ब्लैक फंगस इंफेक्शन के 78 मरीज सामनेे आ चुके हैं। ब्लैक फंगस इंफेक्शन से सर्वाधिक प्रभावित वाराणसी में 23 मरीज मिले हैं। वहीं मेरठ जिले में भी 2 की मौत, 10 मरीज ब्लैक फंगस इंफेक्शन से पीड़ित हैं। मथुरा में ब्लैक फंगस के कारण दो लोगों की आखोें की रोशनी चली गयी और लखनऊ में इंफेक्शन से मौत हो चुकी है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में बढ़ते जा रहे ब्लैक फंगस इंफेक्शन को रोकना स्वास्थ विभाग के लिये बड़ी चुनौती बना हुआ है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार राजधानी लखनऊ भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन के कोप से अछूता नहीं है और यहां अब तब 17 मरीजों में ब्लैक फंगस मिल चुका है। लखनऊ लोहिया संस्थान में भर्ती ब्लैक फंगस इंफेक्शन एक महिला की जान भी जा चुकी है। कानपुर में ब्लैक फंगस इंफेक्शन के दो मरीज भी जान गंवा चुके हैं। वाराणसी में एक महिला का आधा चेहरा हटाकर उसकी जान बचाई जा सकी है। वहीं मेरठ जिले में भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन के दो मरीज भी जान गंवा चुके हैं।
कोरोना सहित गंभीर रोगों से पीड़ितों के लिये खतरनाक है ब्लैक फंगस
म्यूकरमाइकोसिस जिसे ब्लैक फंगस इंफेक्शन भी कहा जाता है भारत के लिये कोई नई बीमारी नहीं है मगर कोरोेना संक्रमितों व अन्य गंभीर रोगों से पीड़ित मरीजों के लिये यह बेहद खतरनाक साबित हो रही है। कारण यह कि कोरोेना के उपचार में दी जा रही स्टेराॅयड मरीजों के शुगर लेवल को बढ़ा रही है। ऐसे में कोरोना संक्रमण के साथ ब्लड कैंसर, गुर्दा रोग, डायबिटीज, कैंसर जैसे गंभीर रोगों से पीड़ित या किडनी-बोनमैरो ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीजों के लिये ब्लैक फंगस इंफेक्शन जानलेवा भी साबित हो रहा है।
ब्लैक फंगस इंफेक्शन मरीजों की आंखोें की रोेशनी छीनने के अलावा उनके दिमाग, फेेफड़े या त्वचा को भी प्रभावित कर सकता है। ब्लैक फंगस इंफेक्शन से प्रभावित व्यक्ति को दांत में दर्द होना, दांत का टूटना, जबड़ों में दर्द रहना, आंखें लाल और पलकों पर सूजन दिखना, आंखों में दर्द के साथ धुंधला या दोहरा दिखाई देना, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होना, नाक के पास लालिमा हो जाना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। समय से उपचार न होने पर मरीज के जबडे़ और नाक की हड्डी गलने के मामले भी सामने आ रहे हैं। अधिक समय तक स्टेरायड का सेवन करने वाले कोरोेना संक्रमितों में अस्पताल में भर्ती रहने या रिकवर हो जाने के बाद भी ब्लैक फंगस इंफेक्शन की परेशानी देखने को मिल रही है।

