पूर्वोत्तर राज्यों त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. इन तीनों राज्यों में भाजपा या उनके सहयोगियों की सरकारें हैं और उन्हें कांग्रेस, वामदलों के साथ दूसरी क्षेत्रीय पार्टियों से ज़बरदस्त टक्कर मिलने वाली है. भाजपा के चाणक्य गृह मंत्री अमित शाह के इन राज्यों के दौरे शुरू हो चुके हैं. दिलचस्प बात यह है कि तीनों ही राज्यों में 60-60 सीटें हैं. पिछले चुनाव में त्रिपुरा से वामदलों का शासन ख़त्म करने वाली भाजपा को इस बार बड़ी चुनौती मिलने वाली है क्योंकि भाजपा को हटाने के लिए वामदल और कांग्रेस के साथ आने की ख़बरें आ रही हैं.
मेघालय में ममता बढ़ाएंगी मुश्किलें
मेघालय में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) सरकार को भाजपा का समर्थन प्राप्त है, यहाँ पर इस बार ममता बनर्जी की पार्टी TMC काफी गंभीर है और पिछले दो सालों से अपनी गोटियां बिछाने में लगी है. मेघालय में भाजपा ने केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद पूरा ध्यान केंद्रित किया है लेकिन अभी पीछे रहकर वो क्षेत्रीय पार्टियों को ही सहयोग दे रही है. कभी इस पहाड़ी राज्य में शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी भी अपनी वापसी को कोशिश में है और पुरानी प्रतिष्ठा को हासिल करना चाहती है. मेघालय में TMC कितनी गंभीर है यह इस बात से पता चलता है कि उसने सभी सीटों के उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया है. इसका मतलब वहां उसका किसी से गठबंधन करने का कोई मूड नहीं है. दरअसल ममता बनर्जी केजरीवाल की तरह अपनी पार्टी का विस्तार चाहती हैं और इसी लिए वो मेघालय के लिए कई सालों से कोशिश कर रही हैं. जहा तक कांग्रेस की बात है तो पिछले चुनाव में वो सबसे बड़ी पार्टी ज़रूर थी लेकिन सरकार बना पाने में नाकाम रही थी. तृणमूल कांग्रेस ने बाद में कांग्रेस के 11 विधायकों को तोड़ लिया था.
त्रिपुरा में हो सकती है वाम की वापसी
त्रिपुरा में पिछली बार 25 वर्षों की वामपंथी सरकार को पस्त करने वाली भाजपा के लिए इस बार माहौल सही नहीं लग रहा है. आदिवासी वोट जो छिटककर भाजपा की तरफ चला गया था एकबार फिर वाम दल के साथ आता नज़र आ रहा है. वहीँ नागालैंड एक ऐसा राज्य है जहाँ विपक्ष है ही नहीं। सभी 60 विधायक NDPP सरकार के साथ हैं. इस समय नेफ्यू रियो के नेतृत्व में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक एलायंस की सरकार में एनडीपीपी के 42, भाजपा के 12, एनपीएफ के चार और दो निर्दलीय विधायक हैं।

