2019 में हारी हुई सीटों पर भाजपा का फोकस

पॉलिटिक्स2019 में हारी हुई सीटों पर भाजपा का फोकस

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तीसरी बार केंद्र में सत्ता हासिल करने के लिए भाजपा का फोकस देश कि उन 160 लोकसभा सीटों पर है जहाँ पर 2019 में उसे हार का सामना करना पड़ा था. भाजपा यह मान चल रही है राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र, कर्नाटक जैसे राज्यों में शायद इस बार वो पहले जितनी सीटें न निकाल पाए ऐसे में उसकी निगाह साउथ के राज्यों की तरफ है और उत्तर प्रदेश कि 14 सीटों समेत देश में बाकी हारने वाली सीटों पर है जहाँ से भरपाई की जा सके.

50 से ज़्यादा प्रधानमंत्री की रैलियां

देश के कई राज्य ऐसे हैं जहाँ भाजपा के पास कोई ऐसा नेता नहीं है जो मोदी जी के अलावा भी अपने दम पर कुछ सीटें हासिल कर सके, ऐसे में सारा दारोमदार प्रधानमंत्री मोदी पर ही है. भाजपा इन 160 निर्वाचन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में चुनावी रैलियां कराने जा रही है. भाजपा ने इन 160 लोकसभा क्षेत्रो को अलग अलग समूह में बांटा है और अपने तीन तेज़तर्रार महासचिवों विनोद तावड़े, तरुण चुघ और सुनील बंसल को प्रधानमंत्री की रैलियों की ज़िम्मेदारी सौंपी है.

रैलियों में प्रधानमंत्री करेंगे सरकारी योजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास

भाजपा ने इन 160 सीटों को 40 समूहों में बांटा है और हर समूह यानि चार लोकसभा सीटों पर प्रधानमंत्री मोदी की एक या एक से ज़्यादा चुनावी रैली कराई जाएगी। किस समूह में एक से ज़्यादा चुनावी रैली होंगी इसका फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में आंकलन की रिपोर्ट पर तय किया जायेगा। यह सारी सभाएं सरकारी होंगी जिनमें केंद्र या भाजपा शासित राज्यों की योजनाओं के शिलान्यास या उद्घाटन किये जायेंगे। दूसरी भाषा में आप इन्हें सरकारी पैसों पर चुनाव प्रचार वाली रैलियां भी कह सकते हैं. जिनका चलन 2014 के बाद से बहुत बढ़ गया है. भाजपा के चुनाव प्रचार का ये पहला चरण होगा, इसके बाद देश की शेष लोकसभा सीटों पर दूसरे चरण में चुनावी रैलियों का आयोजन होगा।

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