तीसरे चरण में भाजपा का तुष्टीकरण और जातीय समीकरण पर जोर, मुस्लिम महिलाओं को साधने की कोशिश

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तीसरे चरण में भाजपा का तुष्टीकरण और जातीय समीकरण पर जोर, मुस्लिम महिलाओं को साधने की कोशिश

मेरठ। तीसरे चरण के चुनाव में भाजपा एक और फार्मूले पर काम करने की जुगत में है। पहले दो चुनावों में आशा के अनुरूप भाजपा को मतदाताओं के लुभाने में फेल होने पर अब तीसरे चरण में पार्टी ने बहुत कुछ बदल दिया है। अब तीसने चरण में भाजपा तुष्टीकरण और जातीय समीकरण पर जोर दे रही है। हालांकि जातीय समीकरण के आधार पर ही सपा पहले से ही तीसरे चरण की सभी 9 जिलों के 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वहीं अब भाजपा ने भी यहां जातीय समीकरणों को साधना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां पर कई चुनावी जनसभा कर तुष्टीकरण का मामला उठाकर इसको हवा दी है। वहीं भाजपा इस बार इस इलाके में मुस्लिम महिलाओं को भी साधने की कोशिश में जुटी हुई है।

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गड़रियों और अहीरों के बीच जंग :
तीसरे चरण की जंग गड़रियां और अहिरों के बीच की है। गडरिया और अहिर भाई-भाई के मुहावरे की असल पहचान इसी इलाके में होती है। मैनपुरी को यादवलैंड की राजधानी कहा जाता है। इस जिले की करहल विधानसभा सीट से अखिलेश यादव और केंद्रीय मंत्री एसपीएस बघेल आमने सामने मैदान में हैं। बघेल गड़रिया जाति से आते हैं। जो प्रदेश की पिछड़ी जातियों में शामिल है। वो गड़रिया की उपजाति धनगर के नाम से अपना प्रमाण पत्र बनवाकर अनुसूचित जाति कोटे की सीट पर सांसद बने। हालांकि इनका मामला इस समय सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप के दौर चल रहे हैं। बघेल,गड़रिया और पाल जाति की इस सीट पर 40 हजार वोटे हैं। जबकि यादव बिरादरी की इस सीट पर 60 हजार से अधिक वोटें हैं। ऐसे में जाति और तुष्टिकरण के खेल में कौन कामयाब होता है ये देखने की बात है। मुकाबला काफी दिलचस्प और नजदीकी है।

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