Gujarat Chunavi Dangal: चुनाव से पूर्व आदिवासी समाज पर क्यों मेहरबान हुई भगवा सरकार

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Gujarat Chunavi Dangal – गुजरात मे होने वाले चुनाव से पूर्व राज्य सरकार जनता पर मेहरबान हो गई है। अभी हाल ही में जहां आदिवासी समाज को अपने खेमे में करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने तापी नर्मदा परियोजना को रद्द कर दिया वही अब सरकार ने आदिवासी समाज के हित को ध्यान में रखते हुए उन्हें कम दरों पर बीज और उर्वरक मुहैया करवाने की बात कही है। गुजरात राज्य सरकार ने इस उद्देश्य के तहत कृषि विविधीकरण योजना’ से साल 2022-23 में राज्य के 1.23 लाख आदिवासी किसानों को ज्यादा कम दरों पर बीज और उर्वरक उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।

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गुजरात राज्य सरकार की यह योजना एक दशक से चल रही है इस योजना के तहत गुजरात के किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। अगर हम पिछले 7 वर्ष के आकड़े की बात करें तो इस योजना के सबसे अधिक लाभार्थी आदिवासी समाज के लोग हैं। सरकार ने इस योजना के तहत अब गुजरात मे खाद और बीज का किट बांटना शुरू किया है। अधिकारियों का कहना है कि एक किट की अनुमानित लागत 3,240 रुपये है, लेकिन योजना के तहत लाभार्थियों से सिर्फ 250 रुपये लिए जाते हैं और उन्हें यह किट दी जाती है।

इस योजना का लाभ लोगो को देने के लिए सरकार ने एक पोर्टल विकसित किया है सरकार का कहना है कि लोग इस पोर्टल के माध्यम से अपना आवेदन कर सकते हैं। पिछले साल तक मैनुअल तौर पर आवेदन दिया जाता था। भूपेंद्र पटेल का कहना है कि इस साल 1.23 लाख आदिवासी किसानों को योजना का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।

जाने क्या मिलता है सरकार की इस किट में:- 

पिछले साल से ‘कृषि विविधीकरण योजना’ के तहत गुजरात सरकार एक आदिवासी लाभार्थी को सब्जियों या मक्का के बीज के साथ डीएपी (डायमोनियम फॉस्फेट) का एक बैग और जैविक उर्वरकों का एक बैग दिया जा रहा है. योजना के तहत पूर्व में मक्का, बैगन, टमाटर भिंडी, करेला और लौकी के बीज दिए गए।

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क्या है आदिवासी पर मेहरबानी के पीछे का उद्देश्य:- 

विशेषज्ञ का कहना है कि आदिवासी समाज पर गुजरात सरकार की इस मेहरबानी के पीछे का सबसे अमुख कारण गुजरात मे होने वाला विधानसभा चुनाव है। इस चुनाव में भाजपा आदिवासी वोट बैंक को अपने खेमे में करना चाहती है। अभी हाल ही में भाजपा ने तापी नर्मदा प्रोजेक्ट को रद्द कर आदिवासी समाज को लुभाने की कोशिश की थी। क्योंकि यह एक ऐसी परियोजना थी जिसका विरोध लम्बे समय से आदिवासी समाज कर रहा था और विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बनाए हुए था। वही अब भाजपा इस परियोजना के तहत आदिवासी समाज को लुभाने की कोशिश में जुटी हुई है।

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