BJP Victory: किसानों की राजधानी सिसौली में BJP को मिले बंपर वोट, मतदाताओं ने टिकैत को किया दरकिनार

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BJP Victory: किसानों की राजधानी सिसौली में BJP को मिले बंपर वोट, मतदाताओं ने टिकैत को किया दरकिनार

मेरठ। पश्चिमी उप्र में भले ही भाजपा (BJP) का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा हो। लेकिन भाकियू के गढ़ में भाजपा को बंपर वोट मिले। किसानों की राजधानी कही जाने वाली सिसौली (Sisauli) के मतदाताओं ने जूमकर भाजपा को वोट किया। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव की अपेक्षा भाजपा को यहां पर कम वोट मिले लेकिन यहां पर भाजपा को गठबंधन प्रत्याशी के मुकाबले बराबर ही मत पड़े। इसे हालांकि भाजपा अपने नुकसान के रूप में देख रही है। लेकिन जिस तरह से भाकियू ने और विपक्ष ने माहौल बनाया था उसको देखते हुए यह भाजपा की जीत ही कही जा सकती है। हालांकि बुढाना सीट से भाजपा प्रत्याशी उमेश ​मलिक चुनाव हार गए। लेकिन वे फिर भी किसानों की राजधानी सिसौली से 3171 वोट लेने में कामयाब रहे। 2019 के लोकसभा चुनाव के विपरीत इस बार भाजपा को 1285 वोट कम मिले। हालांकि इसको किसान आंदोलन का असर बताया जा रहा है लेकिन इसके बाद भी भाजपा के पक्ष में सिसौली में माहौल बना रहा और 3171 वोट मिले।

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बात 2017 में हुए विधानसभा चुनाव की करें तो उस दौरान सिसौली से भाजपा को 4261 वोट मिले थे। उस लिहाज से इसको नुकसान के रूप में देखा जा सकता है। सिसौली से रालोद प्रत्याशी राजपाल बालियान को 3400 वोट मिले। 2019 में केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान को सिसौली से 4456 वोट मिले थे, जबकि इस बार सिटिग विधायक उमेश मलिक को 3171 वोट मिले। बता दें कि सिसौली किसान मसीहा महेंद्र सिं​ह टिकैत (Mahinder Singh Tikait) की कर्मभूमि और उनका गांव है। उनके बेटे भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और प्रवक्ता राकेश टिकैत ने महेंद्र सिंह टिकैत के बाद उनकी बागडोर संभाली है। दिलचस्प है कि यहां की पट्टी लेपरान के बूथ संख्या 168 पर भाजपा प्रत्याशी उमेश मलिक को 521 और रालोद को मात्र 185 वोट मिले। सिसौली के अंबेडकर भवन के बूथ पर भी भाजपा को 297 वोट मिले जबकि गठबंधन को 178 वोटों मिले।

मतदाताओं पर नहीं पड़ा कोक्को और हऊ का असर :
मतदान से पहले ही जिले में कोक्को और हऊ वोटों की राजनीति में घुस आया था। जिसमें भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि भाजपा के वोट कोक्को ले गया। उसके जवाब में केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान के कोक्को को हऊ के ले जाने का बयान जारी किया। जिसके बार कोक्को और हऊ पूरे मतदान के दिन छाए रहे। लेकिन मतदाताओं पर न तो कोक्को का असर हुआ और न हऊ का।

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हालांकि ये दोनो शब्त चुनाव में चर्चा का विषय बने रहे। लोग कोक्को और हऊ के बारे में पूछते रहे लेकिन यहां पर हम बताते हैं कि कोक्को चिड़िया की ओर इशारा करने वाला शब्द पश्चिमी उप्र में बोला जाता है जबकि हऊ किसी अनजान ताकत की ओर इशारा करने वाला शब्द है। पश्चिमी उप्र के गांवों में ये दोनों शब्द बच्चों और महिलाओं के बीच खूब प्रचलित हैं।

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