लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने 18 मंडलों में से आधे पदाधिकारियों और जिलों के अहम जिम्मेदार नेताओं के साथ समीक्षा बैठक की। इस दौरान बसपा प्रमुख ने जिलों में हो रहे प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी की सराहना की। साथ ही पोलिंग बूथ की कमेटियों के कार्यकलापों की तैयारियों की समीक्षा की। बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों व कमेटियों के जिम्मेदारों को कहा कि बचे हुए कामों को युद्ध स्तर से पूरा किया जाए। मायावती ने कहा कि बसपा के बढ़ते जनाधार खासकर प्रबुद्ध वर्ग संगोष्ठी की जिले-जिले में अपार सफलताओं से विरोधियों में खलबली मच गई। भाजपा भी यूपी से अपनी सत्ता जाते हुए देखकर घबड़ा गई है।
मायावती ने कहा कि हरियाणा सरकार का रवैया लगातार किसान विरोधी बना हुआ है। आंदोलित किसानों के साथ होने की सरकारी आदेशों को भी सही कराने का प्रयास किया जा रहा है, जो अतिनिंदनीय है। आंदोलित किसानों ने अब यूपी में भी अपनी सक्रियता और अधिक बढ़ाने की घोषणा की है। इसके मद्देनजर यूपी सरकार से आग्रह है कि वह हरियाणा व मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों के खिलाफ बर्बर व्यवहार न करे तो उचित होगा। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने यूपी के 18 मंडलों में से लगभग आधे मंडलों के वरिष्ठ जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ अहम बैठक में पार्टी संगठन के सभी स्तर की कमेटियों में खासकर पोलिंग बूथ की कमेटियों कार्यकलापों उनकी तैयारियों क्या है गहन समीक्षा की।
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बैठक में सभी को हिदायत देते हुए उन्होंने कहा कि पूरी कमेटी व उन्हें कैडर बैठकों के जरिए सभी को उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट तौर पर जरूर ध्यान दिया जाएगा। उनके कार्यों की लगातार समीक्षा होती रहनी बहुत जरूरी है जिसकी रिपोर्ट से उन्हें भी अपडेट रखा जाए। खासकर आगामी विधानसभा आम चुनाव के मद्देनजर जिस प्रकार से कांग्रेस भाजपा व समाजवादी पार्टी द्वारा बसपा मूवमेंट व उनके नेतृत्व के खिलाफ किस्म-किस्म के हथकंडे इस्तेमाल किया जा रहे हैं। उनका सामना करने के लिए पहले से ज्यादा अधिक सजग रहना बहुत जरूरी हो गया है।
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मायावती ने बैठक में कहा कि बसपा के एक बेहतर विकल्प के रूप में उभरने से भाजपा काफी घबराई हुई है। विशेषकर बसपा द्वारा संचालित प्रबुद्ध के सम्मान सुरक्षा व तरक्की अधिकार को लेकर सभी जिलों में चल रहे कार्यक्रम की सफलता से इनमें काफी बेचैनी है और उनकी नींद उड़ गई है।
किसान आंदोलन पर जताई चिंता
मायावती ने बैठक में किसान आंदोलन पर चिंता जताते हुए कहा कि लगभग 9 महीने से खासकर दिल्ली में उसके आसपास के राज्यों में भी लगातार जारी आंदोलन जारी है। किसानों के तीन कृषि बिल कानून की वापसी की मांग के प्रति केंद्र सरकार को अपना अडिय़ल रवैया समाप्त कर इस पर सहानुभूति पूर्वक विचार करना चाहिए। इसे किसानों की मान सम्मान करते हैं और व्यापक देश हित में तुरंत वापस ले लेना चाहिए, बसपा की पुन: अपील है। वैसे भी उनको विश्वास में लिए बिना यह कानून नहीं बनाना चाहिए था। ऐसा करके सरकार ने बहुत बड़ी गलती की है जिसका आवश्यक सुधार बहुत जरूरी हो गया है। केंद्र सरकार की इस प्रकार के अनुचित व अडिय़ल रवैये के कारण ही बीजेपी शासित राज्य सरकारें भी किसानों को एक प्रकार से अपना प्रतिरोध मानकर व्यवहार करने लगी हैं।

