नई दिल्ली। इन दिनों गर्मी में बिहार की राजनीति तपने लगी है। लालू यादव जेल से बाहर आ गए हैं। मुख्यमंत्री नीतिश कुमार कई बार लालू पुत्र तेजस्वी यादव से मिल चुके हैं। इससे बिहार के राजनीतिक गलियारे में कयासों का बाजार खूब गर्म है। गत दिनों मुख्यमंत्री नीतिश यादव तेजस्वी यादव की बुलाई इफ्तार पार्टी में शामिल हुए तो बिहार की राजनीति को हवा मिल गई।
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जेडीयू का साथ छोड़ने के बाद पहली बार नीतिश कुमार लालू के घर पहुंचे थे। इस समय बिहार की राजनीति में भाजपा अपनी जड़े पूरी तरह से जमा चुकी है। लिहाजा भाजपा अब आगामी विधान सभा चुनाव में राज्य में अपना मुख्यमंत्री चाहती है। वैसे भी बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार के संबंध देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कभी अच्छे नहीं रहे। वहीं जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता आलोक का कहना है कि नीतिश कुमार किसी के नेतृत्व में काम करना पसंद नहीं करेंगे।
खासकर अगर सामने तेजस्वी हो तो ऐसा संभव ही नहीं है। बिहार में 2025 में विधानसभा चुनाव होने हैं। लेकिन उससे पहले आम चुनाव होने हैं। जिसमें लालू की पार्टी,भाजपा और जेडीयू के बीच कड़ी टक्कर होनी है। हालांकि भाजपा का कहना है कि बिहार के अगले मुख्यमंत्री भी नीतीश कुमार ही होंगे। लेकिन राजनीतिक जानकार इसको भाजपा का पैतरा मान रहे हैं जो कि 2024 के आम चुनाव को लेकर चला गया है।
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भाजपा नेता सुशील मोदी जो कि नीतिश के पुराने मित्र हैं उनका कहना है कि नीतीश के बारे में ये चर्चा केवल अफवाह है। लेकिन बिहार की सियासत में यह अफवाह कही जाने वाली यह चर्चा तब और गरमाई जब एक सप्ताह के भीतर दो बार नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव की बातचीत हुई। बता दें कि नीतीश कुमार सत्ता के लिए दल बदलते रहे हैं। नीतीश कुमार बिहार में भाजपा गठबंधन के साथ सरकार बनाने के बाद एडीए छोड़कर आरजेडी में गए। आरजेडी के साथ सरकार बनाने के बाद वह भाजपा की ओर चले आए और एनडीए में शामिल हो गए।

