Drug trafficking networks: भारत में डार्कनेट पर ड्रग तस्करी का नेटवर्क चल रहा है। इसका खुलासा होने के बाद भारत के सामने इसको रोकना एक बड़ी चुनौती बन गई है। देश के कई राज्य इस समय ड्रग की चपेट में हैं। जिनमें पूर्वोत्तर के अलावा पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ शामिल हैं। इससे पहले फेडरल एंटी-नारकोटिक्स एजेंसी ने जून में 15,000 एलएसडी ब्लॉट का जखीरा पकड़ा था।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने आज मंगलवार को डार्कनेट पर संचालित देश के बड़े ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने का दावा किया। जिसमें एनसीबी ने कहा कि तस्करों से बड़ी संख्या में एलएसडी जब्ती की गई है। बता दें इससे पहले संघीय मादक द्रव्यरोधी एजेंसी ने जून में एलएसडी ब्लॉट जब्त किया गया था।
बड़ी मात्रा में एलएसडी जब्त
अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने बड़े और हाईएस्ट-रेटेड एलएसडी कार्टेल वाले भारतीय डार्कनेट ड्रग तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। जिसमें बड़ी मात्रा में एलएसडी जब्त हुई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने इस छापेमारी में 13,000 से ज्यादा ब्लॉट और 26 लाख रुपए नकद बरामद के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। एनसीबी डिप्टी डायरेक्टर ज्ञानेश्वर सिंह ने कहा कि ‘जंबाडा’ नाम के कार्टेल के पास हेलुसीनोजेनिक कैटगरी का ड्रग का मिला है। उन्होंने कहा इनके पास अधिक मात्रा में व्यापार और सप्लाई चैन है और यह कार्टेल यूएस, यूके, कनाडा, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, रूस, ग्रीस, पुर्तगाल और तुर्किये में काम कर रहा है।
सबसे बड़ा कार्टेल भंडाफोड
अधिकारियों ने कहा कि पिछले तीन महीनों में यह दूसरा एलएसडी तस्करी कार्टेल एजेंसी के द्वारा भंडाफोड़ किया है। संघीय मादक द्रव्य निरोधक एजेंसी ने एक ऑपरेशन में अब तक का सबसे बड़ा कार्टेल भंडाफोड किया है। जिसमें आधा दर्जन लोगों को भी गिरफ्तार किया गया था। एलएसडी या लिसेर्जिक एसिड डायथाइलैमाइड सिंथेटिक रसायन दवा है। इसे हेलुसीनोजेन के रूप में वर्गीकृत किया है। इसका दुरुपयोग बड़े पैमाने पर युवाओं पर होता है। इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं।
क्या होता है डार्कनेट?
डार्कनेट, जिसे डार्कनेट या डीप नेट कहा जाता है। इंटरनेट का एक एन्क्रिप्टेड भाग है। जिसे आमतौर पर सर्च इंजन द्वारा उपयोग नहीं किया जाता है। यानी यह आमतौर पर प्रयोग किये जाने वाले गूगल, बिंग जैसे सर्च इंजनों और सामान्य ब्राउजिंग के दायरे से बाहर है। डार्कनेट पर कुछ चुनिंदा लोगों की पहुंच होती है और दावा किया जाता है कि डार्कनेट का उपयोग अवैध और आपराधिक कार्यों के लिए होता है। डार्क वेब का उपयोग मानव तस्करी, हथियार तस्करी, मादक पदार्थों की खरीद और बिक्री जैसी अवैध गतिविधियों में किया जाता है।
