तकनीकी:- मौसम का रुख बदल गया है अब नहीं पता चल पाता कि कब हमे गर्मी का सामना करना पड़ जाए और कब हम ठंड से कांपने लगे। जलवायु परिवर्तन के इस स्वरूप को देखते हुए तकनीकी में भी कई बड़े परिवर्तन देंखने को मिले हैं और अब वैज्ञानिक सभी को सौर ऊर्जा के उपयोग की सलाह दे रहे हैं। लेकिन इसके उपयोग को बढ़ावा न मिल पाने का सबसे प्रमुख कारण है इसके चार्ज का सिस्टम क्योंकि यह एक ऐसी तकनीकी पर बना उपकरण है जिसे चार्ज करने के लिए सूर्य की रोशनी का होना आवश्यक है वही हमारे देश मे कई जगह ऐसी हैं जहां उचित तरीके से सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच पाती है और लोग सोलर पैनल का उपयोग करने से कतराते हैं।
वही अब वैज्ञानिकों ने अपनी सूझ बूझ से लोगों की इस समस्या का हल निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है और एक ऐसी युकित खोज निकाली है जो रात में सोलर सिस्टम को चार्ज करने की शक्ति रखती है। असल मे यह दावा ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी (UNSW सिडनी) ने की है।
ऑस्ट्रेलिया की न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी (UNSW सिडनी) ने दावा किया है कि रात को पैदा होने वाली गर्मी से सोलर पैनल को चार्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा है दिन में जब सूर्य की रोशनी पृथ्वी पर पड़ती है तो वह पृथ्वी को गर्म कर देता है वही जब रात में ठंडक का समय होता है तो पृथ्वी उस गर्म ऊर्जा को वापस अंतरिक्ष की ओर भेजती है सूर्य और पृथ्वी की यह प्रक्रिया दिन रात चलती रहती है।
वही पृथ्वी जब अंतरिक्ष मे गर्म ऊर्जा भेजती है तो रेडिएटेड एनर्जी पृथ्वी की सतह से निकलती है यह एक प्रकार का थर्मल उत्सर्जन होता है, जिसे टैप किया जा सकता है। रिसर्चर्स ने कहा है कि इस ऊर्जा को सेल डिवाइस में टैप किया जा सकता है और बिजली में बदला जा सकता है और इसके उपयोग से सोलर पैनल को चार्ज किया जा सकता है।

