शिवबाड़ी मंदिर में हर साल आते हैं स्वयं भोलेनाथ

धर्मशिवबाड़ी मंदिर में हर साल आते हैं स्वयं भोलेनाथ

Date:

  • दर्शन करने मात्र से होती है हर मनोकामना पूरी
  • हजारों साल पुराने शिवलिंग की होती है पूजा

भारत देश ऋषियों मुनियों की धरती मानी जाती है। यहाँ के कण-कण में भक्ति की अविरल धारा बहती है। इसी देश में एक ऐसा भी मंदिर है जहां भोलेनाथ स्वयं हर साल आते हैं और भक्तों की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। कहां जाता है कि जो भी भक्त इस मंदिर में आकर अपनी मनोकामना भोलेनाथ से कहता है, वह कभी भी खाली हाथ नहीं लौटता है। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में एक कस्बा स्थित है जिसका नाम है गगरेट। इसी कस्बे के पास यह मंदिर स्थित है। जिसे शिवबाड़ी के नाम से जाना जाता है। शिव-बाड़ी जिसका अर्थ है यहाँ शिव का वास हो। कहा जाता है कि इस मंदिर की स्थापना स्वयं शिवजी ने कई हजारों साल पहले की थी। आज भी उनके द्वारा स्थापित किये गए शिवलिंग की यहाँ पूजा होती है।

नागों की तरह झूलती हैं पेड़ों की शाखाएं

होशियारपुर से चिंतपूर्णी मंदिर जाते हुए गगरेट से करीब 1 किमी दूर ये मंदिर स्थापित है। शिव बाड़ी मंदिर की महिमा अवर्णनीय व अनूठी है। चारों तरफ़ से बड़े-बड़े पेड़ों ने इसे ढक रखा है। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही जहां असीम शांति का अनुभव होता है। वहीं यहां की बनावट और पेड़-पौधे भी भगवान भोलेनाथ की भक्ति में झूमते दिखाई देते हैं। इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां के पेड़ों की शाखाएं सीधी नहीं हैं। बल्कि एक दूसरे से इस प्रकार लिपटी हुई हैं मानो नाग एक दूसरे से लिपटे हुए हो। जिन्हें देखने के बाद हर कोई हैरानी में पड़ जाता है।

Read also: बिहार: पाबंदी हटी तो श्रद्धालु भी पहुंचे भगवान के द्वार, मंदिरों में लौटी रौनक

पांडवों ने बनवाया था मंदिर

शिव बाड़ी मंदिर गगरेट के सोमभद्रा नदी के किनारे जंगलों में बना हुआ है। इस मंदिर के निर्माण को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। एक अन्य कथा के अनुसार शिवबाड़ी मंदिर का निर्माण पांडवों ने करवाया था इसे महाभारत कालीन मंदिर भी कहा जाता है। जबकि एक कथा के अनुसार इसे गुरु द्रौणाचार्य की नगरी भी कहा जाता है।

दोर्णाचार्य की पुत्री संग खेलते थे बाल शिव

शिव बाड़ी को लेकर अनेकों अनेक कथाएं प्रचलन में हैं। एक तरफ इसे गुरु द्रोणाचार्य की नगरी कहा जाता है वहीं यह भी माना चाहता है कि भगवान भोलेनाथ बाल रूप में आज भी यहां आते हैं। एक कथा के अनुसार गुरु द्रोणाचार्य हिमाचल जाकर हर दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करते थे। अपने पिता को संध्या पाठ के लिए हिमाचल जाते देख उनकी पुत्री ययाति ने भी एक दिन उनके साथ जाने की जिद की। किंतु गुरु द्रोणाचार्य ने अपनी पुत्री को साथ ले जाने से मना किया, तब वह हठ करके बैठ गई। गुरु द्रोण ने अपनी पुत्री को काफी समझाया किंतु उसने उनकी एक न सुनी। जिसके बाद गुरु द्रोणाचार्य ने एक युक्ति लगाई। उन्होंने अपनी पुत्री से कहा कि वह पहले घर पर रहकर ही शिव जी के बीज मंत्र का जाप करें। इसमें सफल होने के बाद वह उसे अपने साथ हिमाचल ले चलेंगे। पुत्री ने पिता की बात मान ली और घर पर ही बीज मंत्र का जाप करने लगी। उनकी पुत्री पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ भोलेनाथ का जाप करती थी। कुछ दिन बाद ययाति की तपस्या से भोलेनाथ इतने प्रसन्न हुए कि वह स्वयं शिवबाड़ी जाकर उसके साथ खेलने लगे। एक दिन ययाति ने गुरु द्रोण को बताया की एक बालक हर दिन वहां आता है और उसके साथ खेलता है अपनी पुत्री की ऐसी बातें सुनकर गुरु द्रोणाचार्य ने सोचा कि आखिर कौन इस जगह उनकी पुत्री के साथ खेलने आता है। उन्होंने तय कर लिया कि आज देखेंगे कि कौन बालक है।

Read also: पुनिंग मंदिर, चीन में मशहूर हान और तिब्बती शैलियों के मिश्रण वाला मंदिर

अगले दिन उन्होंने देखा कि स्वयं भगवान शिव बाल रूप धारण करके उनकी पुत्री के साथ लीला करने आते हैं। यह सब देख उनकी आंखों में आंसू आ गए और पुत्री को आशीर्वाद देने लगे। उन्होंने सामने आकर भगवान शिव से इस लीला की वजह पूछी, तब शिव जी ने कहा कि इस बच्ची के बाल मन से इतना प्रभावित हुआ कि स्वयं खींचा चला आया। ययाति ने भोलेनाथ को अपने समक्ष देखा तो विनती की, कि वह इस स्थान को छोड़कर अब कभी ना जाएं। उसकी बात सुन भगवान भोलेनाथ ने कहा कि उनका वास हिमालय में है। किंतु अब से शिव बाड़ी में भी उनका वास होगा। जिसके बाद उन्होंने स्वयं गुरु द्रोणाचार्य के साथ उस जगह एक शिवलिंग की स्थापना की और वचन दिया कि हर वर्ष वैशाखी महीने कि दूसरे शनिवार को वह इस स्थान पर अवश्य रहेंगे।

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related

एम्‍वे इंडिया ने प्रीमियम स्किनकेयर पोर्टफोलियो का किया विस्तार

न्‍यूट्रीलाइट स बॉटैनिकल्स की खूबियों से भरपूर आर्टिस्‍ट्री स्किन...

कर्नाटक में जज की कुर्सी पर ‘काला जादू’ करने का आरोप, 65 साल की महिला गिरफ्तार

कर्नाटक के चिक्काबल्लापुर से एक हैरान करने वाला मामला...

ममता बनर्जी का बीजेपी पर हमला, बोलीं- मैं तब तक लड़ती रहूंगी, जब तक आपका अंत नहीं देख लूं

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC)...

प्रधानमंत्री आवास योजना क्या है? पात्रता, लाभ और आवेदन प्रक्रिया

प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर लोगों के मन में...