Astrology:अगर किसी के साथ साझेदारी में नया काम शुरू कर रहे हैं। तो अपनी और बिजनेस पार्टनर की कुंडली को ठीक से देख लें या किसी ज्योतिष को दिखाए। इससे पता चलेगा कि काम सफल होगा या नहीं?
कुंडली में भाव महत्वपूर्ण
कुंडली में सप्तम भाव साझेदार का भाव होता है। तीसरा भाव साहस और पराक्रम का भाव है। किसी नए काम में सफल होने के लिए साहस की जरूरत पड़ती है इसलिए तीसरे भाव काफी महत्व रखता है। जन्मकुंडली में व्यापार का भाव भी सप्तम है। साझेदार साथ काम करेगा कि नहीं इसके लिए कर्म भाव यानी कि दशम भाव बेहद ज़रूरी है। बिजनेस पार्टनर जो कर्म करेगा और अपने संस्थान के लिए काम करेगा। उसका लाभ अपने एकादश भाव से प्राप्त होगा। इसलिए जब भी किसी के साथ बिजनेस साझेदारी करें तो तीसरे, सप्तम, दशम और एकादश भाव की महत्वपूर्ण भूमिका को कुंडली में जरूर दिखवाए।
ऐसे मिल सकता है धोखा
वैदिक ज्योतिष के मुताबिक कुंडली के तीसरे और सप्तम भाव के स्वामी नीच नहीं होने चाहिए। ना कोई नीच का ग्रह इन भाव में विराजमान होना चाहिए। इससे पार्टनर धोखा दे सकता है। आपकी कुंडली में तीसरे और सातवें भाव का स्वामी ना तो एक—दूसरे से छह और आठ हो और ना दूसरे और द्वादश हो। ऐसा होता है तो बिजनेस पार्टनर द्वारा बदनामी झेलनी होगी।
कुंडली में जो तीसरे भाव का स्वामी है वो साझेदार की कुंडली के नवम का स्वामी है या नवम में विराजमान है तो साझे के बिजनेस में सफलता मिलेगी। अगर कुंडली में तीसरे भाव का स्वामी लग्न में है और बिजनेस पार्टनर की कुंडली में लग्न का स्वामी तीसरे भाव में है। इससे बिजनेस साझेदारी जीवन भर चलेगी और कभी टूट नहीं सकती।

