सेफ सीटों के लिए डिप्टी सीएम, मंत्री, सांसद, मेयर और विधायक तक कर रहे दावेदारी
ऊषा सिंह
इस भीषण सर्दी में चुनावी माहौल गरमाया हुआ है। ऐसे में बीजेपी के दिग्गजों की जंग में लखनऊ की सीटों कुछ ज्यादा ही हॉट हो गई हैं। उप मुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री, सांसद, विधायक और मेयर तक इस जंग में कूद पड़े हैं। कोई खुद की टिकट के लिए ये जंग लड़ रहा है तो कोई अपने बेटे और बहू के लिए लड़ रहा है।
जंग का मैदान बनी कैंट सीट
लखनऊ में यूं तो नौ विधान सभा सीटें हैं लेकिन सबसे हॉट सीट बनी हुई है कैंट की सीट। इस सीट पर तीन दशक से बीजेपी का कब्जा रहा है। वर्तमान मेयर संयुक्ता भाटिया के पति सतीश भाटिया यहां से चुनाव जीतते रहे। उसके बाद सुरेश तिवारी यहां से विधायक रहे। सांसद रीता बहुगुणा जोशी भी यहां से जीत चुकी हैं। आसान लग रही इस सीट पर इस बार कई दिग्गज दावेदारी ठोंक रहे हैं। हाल ही में बीजेपी में शामिल हुईं मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव इसी सीट से लड़ना चाहती हैं। वहीं रीता बहुगुणा जोशी अपने बेटे के लिए यहां से टिकट चाह रही हैं। उन्होंने तो चेतावनी तक दे दी है कि ये सीट नहीं मिली तो दूसरी राह तलाशेंगी। संयुक्ता भाटिया यहां से अपनी बहू को और सुरेश तिवारी अपने बेटे को टिकट दिलाना चाहते हैं। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का नाम भी यहां से चल रहा है।
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मंत्रियों के बीच लड़ाई
उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को लखनऊ से चुनाव लड़ाने का ऐलान पार्टी कर चुकी है। यदि कैंट सीट नहीं मिलती है तो फिर उनके लिए लखनऊ पूर्व और मध्य सेफ सीटें हैं लेकिन यहां से दो मंत्री ही विधायक हैं। पूर्व से आशुतोष टंडन और मध्य से ब्रजेश पाठक अपनी सीट आसानी से नहीं छोड़ना चाहेंगे। ऐेसे में उनके लिए लखनऊ उत्तर और पश्चिम की सीटें बचती हैं। लखनऊ उत्तर की सीट से नीरज बोरा विधायक हैं। लखनऊ पश्चिम की सीट विधायक सुरेश श्रीवास्तव के निधन के बाद खाली हुई है लेकिन वह बहुत मुश्किल सीट मानी जा रही है। नए परिसीमन के बाद इसमें पुराने लखनऊ का बड़ा इलाका शामिल हो गया है। इसमें मुसलमानों की अच्छी खासी आबादी है। वहीं सुरेश श्रीवास्तव के निधन के बाद लखनऊ पश्चिम की सीट पर उनके पुत्र और कई बीजेपी नेता दावेदारी कर रहे हैं।
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पति-पत्नी के बीच ही लड़ाई
सरोजनी नगर सीट 2017 में पहली बार बीजेपी ने जीती थी। यहां से मंत्री स्वाति सिंह विधायक हैं। पिछली बार उनके पति दया शंकर सिंह मायावती को गाली देने के आरोप में जेल चले गए थे। उसके बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। ऐसे में बीजेपी ने स्वाति सिंह पर दांव लगाया था। वह जीत गई थीं। अब दया शंकर सिंह बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। वह खुद इस सीट से अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं। उन्होंने अपने होर्डिंग तक लगवा दिया हैं। वहीं स्वाति सिंह खुद ही चुनाव लड़ना चाहती हैं। उन्होंने दया शंकर की दावेदारी पर आपत्ति जताई है। इसके पार्टी की जिला इकाई के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी भी दावेदारी कर रहे हैं। वहीं बख्शी का तालाब सीट पर वर्तमान विधायक अविनाश त्रिवेदी के खिलाफ पार्टी के अंदर ही काफी रोष है। कई युवा नेता यहां से दावेदारी कर रहे हैं।

