उत्तर प्रदेश की दो लोकसभा सीटों रामपुर और आजमगढ़ के लिए हुए उपचुनावों में भाजपा ने सपा की बादशाहत का खत्म कर दिया। दोनों ही सीटों पर भगवा झंडा फहराया गया. आजमगढ़ में जहाँ बसपा के गुड्डू जमाली ने भाजपा को सपा के गढ़ में सेंध लगाने में पूरी मदद की वहीँ रामपुर में आज़म खान के मुताबिक पुलिस प्रशासन के आतंक ने सपा उम्मीदवार को हराने में पूरी मदद की.
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रामपुर में मिली हार के बाद एक टीवी चैनल से बात करते हुए सपा नेता आज़म खान ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति की हार नहीं है बल्कि लोकतंत्र की हार है और बीजेपी को अब लोकतंत्र को हराने में मज़ा आता है. आज़म खान ने कहा चुनाव के दिन पुलिस के द्वारा वोटरों पर जितना ज़ुल्म ढाया जा सकता था ढाया गया, जितने सितम तोड़े जा सकते थे तोड़े गए, महिलाओं और बुज़ुर्गों को दौड़ाया गया, नौजवानों को बुरी तरह पीटा गया, हड्डियां तोड़ीं गयीं. मुसलमानों की बस्तियों में जाकर धमकाया गया कि खबरदार अगर कोई वोट डालने निकला तो अंजाम बुरा होगा। फिर भी जितने लोग वोट डाल पाए उनके जज़्बे को मैं सलाम करता हूँ.
आज़म खान ने कहा कि रामपुर के लोग बहुत कमज़ोर हैं, पहले उनपर अंग्रेज़ सितम तोड़ते थे, हमारे पूर्वजों ने मुल्क को आज़ाद कराया तो यहाँ के नवाबों ने अत्याचार शुरू किया, हमने उनसे लड़ाई लड़ी और जीती भी मगर अब अंग्रेज़ों के मुखबिरों के ज़ुल्मो सितम का शिकार हो रहे हैं. आज़म खान ने कहा कि वोटिंग के दिन जितने लोगों को ठोकरे मारी गयी, कितने लोगों की टोपियों और दाढ़ियों पर हाथ डाला गया, सबूत भरे पड़े हैं इन सब के. अगर कोई एक भी घटना ऐसी बता दे, दिखा दे कि मज़लूम मुसलमानों के अलावा भी किसी और के साथ यह सब किया गया हो तो मैं अपने सारे इलज़ाम वापस ले लूँगा.
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इन उपचुनावों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के चुनाव प्रचार न करने पर आज़म ने कहा कि जब वह नहीं आये तो इतना सितम ढाया गया अगर वो आये होते तो लाठियों की जगह गोलियां चली होतीं। आज़म खान ने कहा कि अगर मुझे मालूम होता कि ऐसे ज़्यादती की जाएगी तो मैं यहाँ से उम्मीदवार ही न उतारता लेकिन हमसे तो कहा गया था कि निष्पक्ष चुनाव होगा।
