मुख्यालय से अटैच की गई डॉ. आरती लाल चंदानी

उत्तर प्रदेशमुख्यालय से अटैच की गई डॉ. आरती लाल चंदानी

Date:


मुख्यालय से अटैच की गई डॉ. आरती लाल चंदानी

अनौपचारिक कही बातों का स्टिंग कर 68 दिनों बाद मामला वायरल किया गया था

कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य रहीं प्रो. आरती लालचंदानी को मुख्यालय से अटैच कर दिया गया है. पहले उन्हें झांसी की ििजम्मेदारी देने की बात कही गई थी. हालांकि तब प्रो. आरती ने बताया था उन्हें अभी शासन से कोई आदेश नहीं मिले हैं. महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (डीजीएमई) कार्यालय से उन्हें संबद्ध कर दिया गया है. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. आर बी कमल को बनाया जा चुका है. बुधवार रात तकरीबन एक बजे के बाद आदेश जारी होने पर जिलाधिकारी डॉ. ब्रह्मदेव राम तिवारी ने एसीएम जयेंद्र और सीओ स्वरूप नगर को भेज कर चार्ज हैंड ओवर करवाया. सुबह 4:00 बजे तक कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया चली. गौरतलब है कि तब्लीगी जमात पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाला पुराना वीडियो वायरल होने पर प्रो. आरती चर्चा में आईं थीं. उसके बाद विभिन्न राजनैतिक और सामाजिक संगठन उनके विरोध में उतर आए थे. राज्यपाल और मुख्यमंत्री से उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे.

केजीएमयू की वीसी की रेस में नाम
सूत्रों का दावा है कि प्रो. आरती लालचंदानी लखनऊ के केजीएमयू कुलपति की रेस में शामिल हैं. उन्हें जल्द ही अनुभव के आधार वहां की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है.

कानपुर के डाक्टरों व कर्मियों में फैला रोष
डा. आरती लाल चंदानी के लखनऊ जाने के बाद कानपुर के वरिष्ठ चिकित्सकों में रोष है. उनका कहना है कि अनऔपचारिक बातों को वीडियो तकरीबन 68 दिन बाद वायरल करना साजिश है. उनका मानना है कि माफी मांगने के बाद जिस तरह से एकतरफा कार्रवाई हुई है यह सही नहीं है. पर्दे के पीछे के लोगों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए.

क्या था मामला?
हैलट अस्पताल के कोविड-19 हॉस्पिटल में बने आइसोलेशन वार्ड में चार अप्रैल को तब्लीगी जमात सदस्यों को एडमिट कराया गया था. इन सभी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव थी. वार्ड में भर्ती होने के बाद जमात के सदस्यों पर डॉक्टरों तथा पैरामेडिकल स्टॉफ को सहयोग नहीं करने, दवाएं नहीं खाने और वार्डों में गंदगी फैलाने और अभ्रदता की हदें पार करने की शिकायत की गई थी. इसके बाद डा. चंदानी मरीजों को समझाने गई थीं. उनको भी जमात के लोगों मरीजों द्वारा सहयोग नहीं मिला तो झल्लाई हुई वापस आने के बाद पत्रकारों ने सवाल जवाब दिए थे. जिनमें अनौपचारिक कही बातों का स्टिंग कर 68 दिनों बाद मामला वायरल किया गया था.

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related