देहरादून। चुनाव कोई भी हो इससे प्रदेश और जिले के बेरोजगार लोगों को रोजगार भी मिलता है। ये हम नहीं खुद सरकारी आंकड़े इसकी हकीकत बया कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव 2022 (Assembly election 2022) की घोषणा निर्वाचन आयोग की तरफ से होते ही कई क्षेत्रों में रोजगार के अवसर खुले। इसके बाद चुनाव के दौरान अधिकांश बेरोजगार लोगों को रोजगार भी सुगमता से उपलब्ध होता चला गया। लेकिन जैसे ही चुनाव समाप्त हुए अब उत्तराखंड में बेरोजगारी का इंडेक्स एक बार फिर से बढ़ने लगा है। जानकारों का कहना है कि इस इंडेक्स बढ़ने की वजह भी विधानसभा चुनाव हैं। विधानसभा चुनाव के दौरान लोगों को खूब रोजगार मिला। हालांकि ये रोजगार आंशिक दिनों के लिए ही था। लेकिन इससे बेरोजगारों को कुछ दिन के काम मिला तो राज्य का बेरोजगारी इंडेक्स भी कम हुआ। अब चुनाव निपट गए तो जिन राज्यों में चुनाव हुए उनमें बेरोजगारी दर में भी उछाल आ गया।
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) (Center for Monitoring Indian Economy (CMIE)) के जारी किए गए मासिक बेरोजगारी आंकड़ों के अनुसार पिछले दो महीने में उत्तराखंड की बेरोजगारी दर 3.5 प्रतिशत से 4.7 प्रतिशत हो गई। जबकि देश के 26 राज्यों के बेरोजगारी दर की लिस्ट में इसका स्थान 15 वें नंबर पर है। जबकि दिसंबर 2021 में बेरोजगारी दर राज्य में पांच प्रतिशत पर थी। प्रदेश में विधानसभा चुनाव 14 फरवरी को हुए। इससे पहले शुरूआत के तीन महीनों से राज्य में सभी दल जोर शोर से चुनावी तैयारी में जुटे थे। जिसके चलते दिसंबर और जनवरी के अलावा फरवरी में भी बेरोजगारों को भरपूर रोजगार इन राजनैतिक दलों द्वारा दिया गया। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद जिन्हें रोजगार मिला वे एक बार फिर से बेरोजगार हो गए। बेरोजगारी दर की बात करें तो जनवरी में यह 3.5 प्रतिशत थी तो फरवरी में यह 4.6 तक पहुंची। उसके बाद यह अब बढ गई है।

