यूपी चुनाव 2022: आखरी चरण में अखिलेश और मोदी के गढ़ में लड़ाई, कई दिग्गजों की साख दांव पर

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यूपी चुनाव 2022: आखरी चरण में अखिलेश और मोदी के गढ़ में लड़ाई, कई दिग्गजों की साख दांव पर

By: Dheeraj Upadhyay   

लखनऊ: UP Elections 2022| उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के अंतिम और सातवें चरण (seventh phase) में 9 जिलों की 54 सीटों में मतदान हो रहा है। बता दे की 2017 के चुनाव में भाजपा गठबंधन (BJP-alliance) ने 54 में से 36 सीटों पर अपना परचम लहराया था। जिसमें भाजपा को 29, अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) को 4 और ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा को 3 सीटों पर जीत मिली थी। जबकि सपा को 11 सीटें, बसपा को 6 और निषाद पार्टी को एक सीट मिली थी। वहीं कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका था।

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गौरतलब है कि 9 जिलों की जिन 54 विधानसभा में आज मतदान है उसमें जातीय समीकरण का भी बहुत महत्त्व है। जैसे- मऊ (Mau) में करीब 20 फीसदी मुसलमान है वहीं आजमगढ़ में करीब 15-16 फीसदी और जबकि जौनपुर और बनारस (Varanasi) में करीब 16 फीसदी तक मुस्लिम आबादी है। वही अंतिम चरण के जिन 9 जिलों में मतदान है, उसमें आजमगढ़, मऊ, सोनभद्र, मिर्जापुर और चंदौली जैसे जिलों में करीब 29 फीसदी दलित मतदाता है। सोनभद्र में करीब 41 फीसदी दलित वोटर है। वहीं आजमगढ़, गाजीपुर और जौनपुर में यादव मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं तो गाजीपुर और मऊ में राजभर और नोनिया चौहान भी अहम है। इसी तरह गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों जैसे वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और गाजीपुर में निषाद मतदाता भी निर्णायक भूमिका में है। 

सातवें चरण में कई दिग्गजों और मंत्रियों की साख दांव पर

पूर्वांचल के इस आखरी और सत्ता के लिए निर्णायक चरण में भाजपा सरकार के आधा दर्जन मंत्रियों के साथ कई दिग्गजों और बहुबलियों की साख दांव पर लगी है। 

वाराणसी दक्षिण में मंत्री और महंत की टक्कर

वाराणसी दक्षिण सीट पर 32 साल से बीजेपी का कब्जा है लेकिन लोग यहाँ भाजपा के मौजूदा विधायक और मंत्री नीलकंठ तिवारी से नाराज दिख रहे है। वहीं सपा (SP) ने महामृत्युंजय मंदिर के महंत श्री कामेश्वर दीक्षित (किशन दीक्षित) को टिकट देकर इस सीट पर मुकाबला दिलचस्प बना दिया है।

सुभासपा के राजभर के खिलाफ जहूराबाद में घेराबंदी ?

भाजपा से अलग होकर सपा का दामन थामने वाले सुभासपा अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के खिलाफ  भाजपा ने कालीचरन राजभर और बसपा ने पूर्व विधायक शादाब फातिमा और कांग्रेस ने ज्ञान प्रकाश को टिकट देकर राजभर के लिए मुक़ाबला कठिन बना दिया है। राजभर के लिए सीट बचाना साख का प्रश्न बन गया है।

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मऊ में बाहुबली की विरासत बचाने उतरेगा बेटा

मऊ सदर से 1996 से लगातार 5 बार विधायक रहे मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) ने अपनी विरासत बचाने का जिम्मा अपने पुत्र अब्बास अंसारी को सौंपा है जो सपा-सुभासपा गठबंधन से मैदान में है। हालांकि योगी सरकार की कड़ाई और मुख्तार के जेल में होने के कारण चुनौती कठिन है। यहाँ भाजपा से अशोक सिंह, वहीं बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर और कांग्रेस से माधवेंद्र सिंह मैदान में हैं।

बाहुबली धनंजय सिंह की साख जौनपुर की मल्हनी में दांव पर?

जौनपुर की मल्हनी सीट से जदयू के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे बाहुबली धनंजय सिंह को  सपा के लकी यादव से चुनौती मिल रही है। वहीं सपा के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी इस सीट सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी प्रचार का अपनी ताकत झोक दी है।

वाराणसी के पिंडरा में क्या कांग्रेस की आस बचा पाएंगे अजय राय?

काशी की पिंडरा से एक बार फिर कांग्रेस (Congress) ने अजय राय को चुनाव मैदान में उतारा है। अजय की गिनती सूबे के बड़े कांग्रेसी नेताओं में होती है इनके लिए राहुल-प्रियंका ने प्रचार किया था। अजय के खिलाफ बीजेपी से वर्तमान विधायक अवधेश सिंह मैदान में है। वहीं सपा गठबंधन से राजेश सिंह और बसपा से बाबूलाल पटेल भीं टक्कर देते दिख रहे है। इससे पहले 2014 और 2019 में अजय राय पीएम मोदी के खिलाफ लोकसभा चुनाव लड़ चुके है।

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मऊ की घोसी सीट से बागी मंत्री दारा सिंह चौहान की प्रतिष्ठा दांव पर

चुनाव से ठीक पहले स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ भाजपा का मंत्री पद छोड़ सपा में आए दारा सिंह चौहान के लिए अपनी सीट बचाना साख का प्रश्न बन गया है। भाजपा ने उनके खिलाफ विजय राजभर को मैदान में उतारा है। वहीं कांग्रेस ने प्रियंका यादव तो बसपा ने वसीम इकबाल को मैदान में उतारा है। पिछले चुनाव में इस सीट पर बीजेपी के फागू चौहान जीते थे लेकिन उनके राज्यपाल बनने के बाद 2019 के उप-चुनाव में भाजपा के विजय राजभर ने फिर यह सीट बीजेपी के खाते में डाल दी थी।

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