पर्वतारोही भावना डेहरिया को एक वक्त लगा था कि वह अब जिंदा नहीं बचेंगी, लेकिन डेढ़ घंटे ऑक्सीजन सिलेंडर के रेगुलेटर से जद्दोजहद करके आखिर माउंट एवेरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फैहराया
Zeba Hasan
वह माउंट एवेरेस्ट की चोटी फतह करने के लिए कदम बढ़ा रही थी। माइनस 45 टेम्प्रेचर की ठंड हडी गलाने के लिए काफी थी। उसके कदम बस बढ़ते जा रहे थे तभी अचानक ऑक्सीन सेलेंडर का रेगूलेटर खराब हो गया। जहां कुछ मिनट रुकना मौत को दावत देना है ऐसे हालात में वह डेढ़ घंटा जिंदगी और मौत के बीच हिम्मत बटोरती रही। डेढ़ घंटे की जद्दोजहद के बाद वह फिर अपनी मंजिल की ओर चल पड़ी और आखिर उसने माउंट ऐवरेस्ट की चोटी पर पहुंच कर यह साबित कर दिया कि लड़की होना कमजोरी नहीं बल्कि अपने आप में एक ताकत है। हम बात कर रहे हैं पर्वतारोही भावना डेहरिया (Mountaineer Bhawana Dehariya) हैं जिन्होंने 22 मई 2019 को विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवेरेस्ट के शिखर पर तिरंगा फैहराकर प्रदेश की पहली महिला बनने का कीर्तिमान रचा है।

क्लास 7 में देखा था ख्वाब
मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव तामिया जो प्रदेश का सबसे डीपेस्ट पॉइंट कहा जाता है, से ताल्लुक रखती हैं भावना। भावना जब सातवीं क्लास में थीं तब उन्होंने अपनी किताब में पहाड़ों के बारे में पढ़ा। उसी वक्त भावना ने पहाड़ों को फतह करने का इरादा कर लिया था। एक छोटे से गांव की छोटी सी लड़की के इस बड़े ख्वाब को जो भी सुनता वह हैरान ही रह जाता था। हालांकि उन्हें कोई गाइडेंस नहीं मिल पा रही थी। यहां तक उनके टीचर भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं रखते थे। लेकिन भावना ने अपना इरदा नहीं बदला। वह तामिया के छोटे-छोटे पहाड़ों पर चढ़ती थीं और खुद को माउंटेनियर मानती थीं। भावना कहती हैं कि जब वह दसवीं में थीं तब गांव में एक कार्यक्रम हुआ जिसमें कुछ पर्वतरोही आए। बस उन्हीं से मिलने के बाद मैंने अपने ख्वाबों तक पहुंचने की मंजिल की तरफ कदम बढ़ा दिया था।

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फीस के लिए की जॉब
भावना (Bhawana Dehariya) कहती हैं कि मिडिल क्लास फैमिली से हूं तो फाइनैंशियली मैंने बहुत स्ट्रगल देखा है। एवेरेस्ट की क्लाइबिंग के लिए मुझे चार साल स्ट्रगल करना पड़ा फिर मुझे सरकार का सपोर्ट मिला। इस बीच मैंने अपने एडवांस कोर्स और ट्रेनिंग्स में फीस जमा करने के लिए जॉब करनी पड़ी। अपने सैलेरी से मैं अपनी फीस भरती थी। जिस वक्त मैं एवेरेस्ट के शिखर पर पहुंची तो खुशी से रो रही थी। अपना सारा स्ट्रगल याद कर रही थी। मैं उस चोटी पर दस मिनट थी और उन दस मिनटों में मैंने जिदंगी के दस जन्मों को जी लिया था। आज मैं एक बेटी की मां हूं और मैं चाहती हूं कि मेरी बेटी भी अपने ख्वाबों को पूरा करे। इस वक्त में जून में होने वाले ट्रैवेल कॉनटीनेंटल में जाने की तैयारी कर रही हूं। किस्मत से मेरे हस्बैंड बहुत सपोर्टिव हैं। अपने अपनी बेटी जो दो साल की है उन्हीं के पास छोड़ कर अपने पहाड़ों को फतह करने के लिए लिकलूंगी।

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शामिल हुआ वर्ल्ड रेकॉर्ड में नाम
भावना (Bhawana Dehariya) ने माउंट एवेरेस्ट फतह करने के बाद विश्व के सात महाद्वीप में से एशिया के बाद अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के सबसे ऊंचे शिखर माउंट किलिमंजरो व माउंट कोज़िअस्को पर भारत के प्रमुख दो त्यौहार दीपावली व होली के दिन फ़तेह कर विश्व में भारतीय संस्कृति का परचम लहराया। विगत वर्ष 15 अगस्त 2020 को भारतीय हिमालय पर्वत शृंख्ला को विश्वभर में प्रमोट करने के लिए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी नाम दर्ज कराया। भावना ने माउंटेनियरिंग के लिए बेसिक, एडवांस और एम.ओ.आई का सर्टिफिकेशन उत्तरकाशी के नेहरू इंस्टिट्यूट से प्राप्त किया है और योगा एवं नेचुरोपैथी में डिप्लोमा के साथ ही भावना ने इसी साल फिजिकल एजुकेशन में मास्टर्स डिग्री प्राप्त की है। भावना अखिल भारतीय फिजिकल एजुकेशन कॉडिनेटर रहने के साथ भोज एडवेंचर फेस्ट भोपाल में बतौर एडवेंचर इंस्ट्राक्टर भी काम कर चुकी हैं।

