मॉकड्रिल का ज़िम्मेदार सिर्फ पारस अस्पताल ही क्यों?

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मॉकड्रिल का ज़िम्मेदार सिर्फ पारस अस्पताल ही क्यों?

ज़ीनत सिद्दीक़ी

मॉकड्रिल का ज़िम्मेदार सिर्फ पारस अस्पताल ही क्यों?

केंद्र और प्रदेश सरकार लगातार यही कहती रही कि देश में ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है और सभी प्रदेशों को उसकी ज़रुरत के हिसाब से पर्याप्त ऑक्सीजन सप्लाई की जा रही है लेकिन उत्तर प्रदेश के आगरा शहर के पारस अस्पताल के एक डॉक्टर के वायरल ऑडियो ने इन झूठे दावों की पोल बड़ी भयावह रूप में खोल दी । इस वायरल ऑडियो में अस्पताल को ऑपरेट करने वाला डॉक्टर ऑक्सीजन की कमी पर बात कर रहा है कि ऑक्सीजन तो कहीं मिल नहीं रही है चलो 5 मिनट के लिए ऑक्सीजन को बंद करके देखा जाए कि क्या होता है? और उसके इस प्रयोग में 22 कोरोना संक्रमितों के मौत की बात कही जा रही है. ऑडियो वायरल होने के बाद यह बात पूरी तरह साफ़ हो जाती है घटना के समय ऑक्सीजन की कमी से स्थितियां जितनी विकट नज़र आ रही थीं उससे कहीं ज़्यादा विकट थीं क्योंकि जब एक डॉक्टर या अस्पताल इस तरह का फैसला (जिसे मीडिया मॉक ड्रिल बता रहा है) लेने लगे तो परिस्थितियों की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है.

आगरा के पारस अस्पताल में 57 कोविड मरीज़ों के भर्ती करने की क्षमता थी मगर घटना के समय 96 कोरोना संक्रमित भर्ती थे. तो सबसे बड़ा सवाल यही पैदा होता कि क्षमता से इतने अधिक मरीज अस्पताल में कैसे भर्ती किए गए क्योंकि कोई भी मरीज बिना जांच कोविड-19 अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकता और इन अस्पतालों में जो भी मरीज भर्ती होते हैं उनका पूरा डेटा सरकार के पास होता है. तो जब क्षमता से इतने अधिक मरीज़ भर्ती हो रहे थे प्रशासन क्या कर रहा था? अगर उसके पास इसकी जानकारी नहीं थी तब तो यह और भी बड़ा अपराध बनता है और अगर जानकारी थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?

अप्रैल- मई के महीने में पूरा देश चीख चीखकर यह कह रहा था कि ऑक्सीजन की ज़बरदस्त किल्लत है. अब तो हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी यह बात मान ली है कि ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गयी थी, हालाँकि अपनी आदत के अनुसार उन्होंने एक बार फिर गलतबयानी की (पद की गरिमा का ख्याल रखते हुए झूठ शब्द का मैं प्रयोग नहीं करूंगी), क्योंकि इस तरह के हालात पैदा होने से पहले ही संसदीय समिति ने उन्हें आने वाली समस्या के बारे अच्छी तरह आगाह भी किया था, मगर अपनी आदत के अनुसार उन्होंने किसी की नहीं सुनी। आगे जो हुआ सभी जानते हैं. बहरहाल प्रचार किया जाने लगा कि ऑक्सीजन की कमी के बारे में विरोधी अफवाह उड़ा रहे हैं, सरकार को बदनाम कर रहे हैं. यूपी की सरकार तो उससे भी आगे बढ़ गयी और ऑक्सीजन की कमी की बात करने वालों पर NSA लगाने की बात कहने लगी, अस्पतालों को अनाधिकारिक रूप निर्देश दिए जाने लगे कि मौतों का कारण ऑक्सीजन की कमी न बताया जाय.अगर अस्पतालों को ऑक्सीजन उनकी आवश्यकता अनुसार मिल रही थी तो अस्पतालों को इस तरह के निर्देश की बातें मीडिया और सोशल मीडिया में कैसे चल रही थीं. इन निर्देशों और NSA लगाने की धमकियों से क्या कोविड अस्पताल, विशेषकर प्राइवेट अस्पताल दबाव में नहीं होंगे? मेरे हिसाब से तो बिलकुल होंगे, इन अस्पतालों को सरकार और प्रशासन के अंडर रहकर ही काम करना होता है और दरिया में रहकर मगरमच्छ से बैर कोई नहीं लेना चाहता। कोविड से मौतों की सही संख्या को छुपाने के लिए इस सरकार ने कोरोना से हुई मौतों का कारण ही बदल दिया। सीधी सी बात यह है कि कोविड-19 रोगी की मृत्यु का कारण कोई भी हो लेकिन अगर मरीज कोविड के लक्षणों के आधार पर भर्ती हुआ है तो उसकी मृत्यु का कारण कोविड-19 ही माना जाना चाहिए।

पारस अस्पताल के डॉक्टर ने जो फैसला लिया, मानवीय रूप से वह ग़लत क़रार दिया जा सकता है, यह फैसला उचित है या अनुचित इस पर तर्क वितर्क हो सकते हैं लेकिन इस फैसले को लेने के पीछे बनी परिस्थितियों का ज़िम्मेदार कौन है? ऑक्सीजन सप्लाई की ज़िम्मेदारी किसकी है? ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने की ज़िम्मेदारी किसकी है? जाहिर है सरकार की ! क्योंकि अगर पर्याप्त ऑक्सीजन होती तो इस कथित मॉकड्रिल की नौबत ही नहीं आती, दिमाग़ में इस तरह का प्रयोग करने का विचार ही नहीं आता. क्या उस डॉक्टर को मालूम नहीं था कि ऑक्सीजन हटने पर क्या होगा? फिर भी उसने यह प्रयोग किया कि जिनको बचाया सकता है उन्हें बचाने की कोशिश की जाय. सवाल यह भी है कि क्या सरकार की इमेज बचाने का दबाव पारस अस्पताल पर इतना था कि उसे कथित मॉकड्रिल जैसा फैसला लेना पड़ा और धरती के भगवान् से हत्यारा बनना पड़ा.

यह तो मात्र एक घटना भर है जो ऑडियो वायरल होने से सामने आ गयी, पता नहीं ऐसी और कितनी घटनाएं हुई होंगी जो दब गयी होंगी या किसी दबाव में दबा दी गयी होंगी। पारस अस्पताल को सील करने और डॉक्टर के खिलाफ FIR करने से सरकार उन सवालों से बच नहीं सकती कि ऐसा फैसला लेने के हालात कैसे और क्यों बने?

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