तेजस्वी का 10 लाख नवजवानो को पक्की सरकारी नौकरी देने का मास्टर स्ट्रोक

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तेजस्वी का 10 लाख नवजवानो को पक्की सरकारी नौकरी देने का मास्टर स्ट्रोक

19 लाख नवजवानों के लिए रोज़गार सृजन के बीजेपी का वादा चुनावी मैदान में टिक नहीं पा रहा

उबैदउल्लाह नासिर

आम तौर से चुनावों में मुदा बीजेपी ही सेट करती है और फिर चुनाव उसी के इर्द गिर्द घूमने लगता है राम बनाम बाबर, राष्ट्रवाद, छद्म धर्मनिरपेक्षता, पाकिस्तान आतंकवाद श्मशान कब्रिस्तान ईद और दिवाली पर बिजली सप्लाई आदि मुद्दों पर ही बीजेपी चुनाव घुमाती रही है और इन मुद्दों को इतनी शिद्दत से उठाती है की आम तौर असल मुद्दा गरीबी बेरोज़गारी किसानों की समस्या कारोबार की समस्या शिक्षा और इलाज की समस्याएं आदि सब धरी की धरी रह जाती हैं ऐसा नहीं की बीजेपी हमेशा इन मुद्दों को भुनाने में सफल रही हो उसे कई बार बल्कि बहुत बार हार का मुंह देखना पडा है लेकिन चुनावों में मुद्दा सेट करने की उसकी छमता से इंकार नहीं किया जा सकता । आरएसएस के अपने नेट वर्क कानाफूसी अफवाहबाज़ी में उसकी महारत के साथ अब इलेक्ट्रॉनिक सोशल और डिजिटल मीडिया पर उसकी अच्छी पकड़ ने उसके काम को और आसान कर दिया है ।

चुनाव में वादों की भरमार कोई नई बात नहीं लोग आम तौर से उन पर बहुत ज्यादा ध्यान भी नहीं देते जैसे २०१४ के आम चुनाव में मोदी जी ने विदेशों से काला धन ला कर हर भारतीय के खाते में 15 -15 लाख रुपया जमा करने का वादा किया था और हर साल दो करोड़ नवजवानो को नौकरी देने की बात कही थी और आखिर में अमित शाह ने इन सबको चुनावी जूमला कह के उस चैप्टर को ही बंद कर दिया था । बिहार विधान सभा के चुनाव में मोदी जी ने जिस प्रकार केन्द्रीय सहायता को नीलामी बोली के अंदाज़ में देनें का एलान किया था 60 हजार करोड़ दूँ ,70 हजार करोड़ दूँ 80 हजार करोड़ दूँ और अंत में 125 करोड़ देने का एलान किया था टेलीविज़न पर जिन लोगों ने यह मंज़र देखा होगा उन्हें अब भी याद होगा लेकिन मिला क्या सब जानते ।

लेकिन इस बार मंजर थोड़ा बदला हुआ है । बिहार विधान सभा के इस बार के चुनाव में तेजस्वी यादव ने बढती बेरोज़गारी के इस दौर में सरकार बन्ने पर अपनी पहली कैबिनेट मीटिंग में अपनी पहली दस्तखत से 10 लाख नवजवानों को पक्की सरकारी नौकरी देने का वादा कर के मुख्य मंत्री नितीश कुमार ही नहीं खुद बीजेपी को कर्तव्य विमूढ़ कर दिया है । उनका यह वादा बिहार के नवजवानों के दिलों में ऐसा घर कर गया की नितीश ही नहीं बीजेपी का भी हर हथकंडा हर जुमला बेअसर साबित हो रहा है । बीजेपी ने अपना सोचा समझा और राम बाण नुस्खा आतंकवाद भी उठाया पाकिस्तान में ख़ुशी मनाने की बात भी उठाई कश्मीर में ज़मीन खरीदने राम मंदिर के निर्माण आदि सारे हथकंडे अपना लिए मगर वह तेजस्वी के तेज की काट नहीं कर पा रही। नितीश और सुशिल मोदी दोनों ने तेजस्वी के वादे का मखौल भी उड़ाया यह भी पूछा की इतने लोगों को नौकरी दोगे तो इनकी पगार कहाँ से आयेगी लेकिन तेजस्वी ने इस सवाल का बहुत होई सधे और परिपक्व अंदाज़ में जवाब दिया और कहा की भ्रष्टाचार में जो 30-35 हज़ार करोड़ का घपला नितीश सरकार में हुआ ऐसे घपलों को रोककर उनसे बची रक़म से पगार दी जाएगी । सभी समझ रहे थे की नीतीश और सुशिल मोदी एक घिसा पिटा सवाल खड़ा कर रहे हैं क्योंको तेजस्वी तो उन्ही पदों पर बहाली का वादा कर रहे हैं जो पहले से सृजित हैं और नितीश उन पर बहाली नहीं कर पाए I सृजित पदों पर बहाली के बाद उनकी पगार का प्रबंध तो बजट में होता ही है यह तो एक मामोली अकल का आदमी भी जानता है इसके अलावा और भी कई मदों से सरकार पैसा निकाल सकती है किसी भी सरकार के पास resources की कमी नहीं होती बस उनके दोहन का सलीका होना चाहिए ।

तेजस्वी की बढ़ती लोकप्रियता उनकी जन सभाओं में उमड़ती भीड़ और अपने पैरों से खिसकती ज़मीन देख कर अब बीजेपी ने भी 19 लाख नवजवानों को रोज़गार देने की संभावनाओं को तलाश करने का वादा केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीता रमण ने vision document जारी करते हुए किया है इसके साथ ही उन्होंने एक और वादा किया की बिहार के लोगों को कोरोना का टीका मुफ्त दिया जाएगा । समझ में नहीं आता की एक केन्द्रीय मंत्री इस तरह की बात कैसे कह सकता है सब से बड़ी बात कोरोना का टीका अभी बना ही नहीं है दुसरे सिर्फ बिहार ही क्यों देश के हर नागरिक को यह टीका मुफ्त मिलना चाहिये चुनाव की हार जीत से इसका कोई सम्बन्ध नही होना चाहिए । राजीव गाँधी ने पोलियो की दवा पिलाने का अभियान शुरू किया था जिसका चुनावी राजनीति से कोई सम्बन्ध उन्होंने नहीं बताया था उनकी शाहदत के बाद सभी सरकारों ने जिसमें अटल जी की सरकार भी शामिल थी यह अभियान जरी रखा और डॉ मनमोहन सिंह के समय भारत पोलियो से मुक्त हो गया किसी प्रधान मंत्री ने इसे राजनेति से नहीं जोड़ा मोदी जी के नेत्रित्व में बीजेपी राजनीति में नए नए आयाम जोड़ रही है ।

19 लाख नवजवानों को रोज़गार देने की सम्भावना की तलाश का वादा कर के बीजेपी ने नितीश बाबू को ही नहीं खुद अपने वरिष्ट नेता सुशिल मोदी को धर्मसंकट में डाल दिया है हैं अब यह दोनों बीजेपी से यह सवाल नहीं कर सकते की वह इन 19 लाख लोगों को पगार देने का पैसा कहां से लाएगी,सुशील मोदी बेचारे अपनी ही पार्टी के जाल में फँस गए हैं अब वह किस से पूछें की पैसा कहाँ से आएगा ? दूसरी सब से महत्व पूर्ण बात यह है की नवजवानों को अभी मोदी जी का 2 करोड़ नौकरियां प्रति वर्ष देने का वादा याद है इस हिसाब से अब तक 14 करोड़ नवजवानों को को नौकरी मिल जनि चाहिए थी लेकिन कडवी सच्चाई यह है की नोट बंदी GST और lockdown के चल्ते करीब 14 करोड़ लोग रोज़गार गंवा चुके है नइ नौकरी मिलना तो बहुत दूर की बात है ।

तेजस्वी के 10 लाख पक्की सरकारी नौकरी देने के वादे के मुकाबले में अगर बीजेपी के रोज़गार सृजन के वादे की analysis की जाये तो पता चलेगा की बीजेपी ने इस मामले में trick खेला है पकौड़ा बेचना भी तो रोज़गार है मोदी जी पहले ही कह चुके है । भीक माँगना भी एक अन्य बीजेपी नेता रोज़गार बता चुके हैं तो तेजस्वी के पक्की सरकारी नौकरी के मुकाबले में पकौड़ा तल के रोज़गार करना कहाँ तक जनता को लुभा सकेगा यह समझने की बात है । यह सही है की कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता अपनी मेहनत से ईमानदारी के साथ जो भी कमाया जाए ऊपर वाला उस में बरकत देता है लेकिन सच्चाई के धरातल पर देखिये तो सरकारी नौकरी से बढ़ कर जीवन यापन की और कोई डगर नवजवानों को पसंद नहीं आ सकती इसी लिए तेजस्वी का तेज बरक़रार है ।

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