देश भर में एक अरब से ज्यादा लोग अपने घरों में सिमट कर रह गए हैं। लोगों के रूटिन बाधित हो गए हैं। काम की आदतें और यहां तक कि सामाजिक मानदंड भी पूरी तरह बदल रहे हैं। निरंतर चल रहा लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की जरूरत शायद उपभोक्ताओं के व्यवहार को स्थायी रूप से बदल देगी। कोई भी विश्वसनीय समाधान फिलहाल दूर ही दिख रहा है। चूंकि ज्यादातर लोग घर के अंदर रहना पसंद करेंगे। भविष्य में इसका प्रभाव लोगों की खपत की आदतों औेर खर्च के पैर्टन में दिखाई देगा। बिजनेस लीडरों और बाज़ार से जुड़े लोगों को अब इस दौर को वास्तविकता के तौर पर अपनाना होगा और आगे बढ़ते हुए अपनी रणनीति पर कड़ी नजर रखनी होगी।
वर्तमान हालात किस तरह से उपभोक्ता के व्यवहार में बदलाव ला रहे हैं ?
कोविड-19 के खिलाफ लंबी खिंचती लड़ाई, हम क्या, कब और कैसे उपभोग करते हैं, इसके तरीकों में बदलाव लाएगी। इस संदर्भ में नीचे कुछ विचारणीय बिंदु दिए जा रहे हैं :
1.उपभोक्ता अपने खर्चों और बजट को सीमित करेंगे : अपनी कमाई में कमी होते देख ग्राहक अपने खर्चों पर नजर रखना शुरू करेंगे और खासकर गैर-जरूरी और शौकिया वस्तुओं की खरीद पर अंकुश लगाएंगे। वे डिस्काउंट, मुफ्त आइटम या किसी अन्य संबंधित सेवा के रूप में अपने हर खर्चे पर कुछ अतिरिक्त पाने चाहत रखेंगे ताकि अपनी खरीद को लेकर उन्हें अच्छा महसूस हो या फिर कम अपराध बोध लगे।
2. भीड़-भाड़ वाली जगहों में जाने से लोग बचेंगे : सोशल डिस्टेंसिंग इतनी आम बात हो जाएगी कि वीकेंड पर शॉपिंग मॉल, मूवी थिएटर और रेस्तरां पर भीड़ होने की कल्पना करना भी मुश्किल हो जाएगा। कई लोग तो सीजनल या स्टॉक क्लियरिंग सेल की भीड़ में घुसना भी पसंद नहीं करेंगे।
3. वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति बढ़ेगी : ज्यादा सुविधा और सुरक्षा चाह रहे कर्मचारियों के बीच वर्क फ्रॉम होम नीति एक जरूरत बन कर उभरेगी। फिजिकल मीटिंग की जगह ई-मीटिंग लेंगी। चूंकि वर्चुअल मीटिंग संगठनों को भी फायदेमंद लगेंगी, ऐसे में, कोविड-19 से पहले वाले बिजनेस ट्रैवेल अब शायद निकट भविष्य में तो देखने को न मिलें। ऐसी स्थिति में संगठन अपने खर्चों को घटाने के लिए अपने कार्यस्थलों, कमर्शियल स्पेस में कमी ला सकते हैं।
4. ज्यादा लोग ऑनलाइन का रुख करेंगे : ज्यादा से ज्यादा उपभोक्ता अब अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए मजबूर होंगे। भारत में ऐसा पहली बार हुआ है कि ग्रामीण भारत से इंटरनेट उपयोग करने वालों की संख्या ज्यादा निकल कर सामने आई है। यहां तक कि सुस्त और बदलावों को लेकर संशय रखने वाले लोग भी ऑनलाइन, घर से पिकअप, डिलीवरी, डिजिटल भुगतान और ओटीटी स्ट्रीमिंग सेवाओं को अपनाते दिखने लगेंगे। जाहिर है कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े ज्यादातर पहलू अब ऑनलाइन शिफ्ट होने लगेंगे। इसका यह मतलब होगा कि कई व्यवसायों को स्थायी नुकसान का सामना करना होगा। तो, जो बिजनेस ऑनलाइन नहीं हैं या जिनकी ऑनलाइन मौजूदगी सीमित है, उनके लिए यह खतरे की घंटी है कि अब वे ज्यादा से ज्यादा टेक्नोलॉजी को अपनाएं और दुकानों में लोगों की संख्या के बजाय अपने व्यूअर्स बढ़ाएं।
5. ग्राहक फिजिकल से ज्यादा तरजीह देंगे फिजिटल को : ऐसे प्रोडक्ट और सेवाएं जिनमें फेस टू फेस मिलना जरूरी होता है, जैसे, मेडिकल कंसल्टेशन, पर्सनल फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट और इंश्योरेंस, उनमें डाटा और टेक्नोलाजी का उपयोग करते हुए सामने दिख रही प्रक्रियाओं को ऑटोमेट बनाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी। कंपनियां भी संपर्क को कम से कम रखने के नए तरीके ढूंढेगीं। उपभोक्ता भी अपने पुराने तौर-तरीकों में बदलाव लाते हुए जहां तक मुमकिन हो, डीआईवाई या टेली या वीडियो सेवाओं का विकल्प चुनेगा। हालांकि अधिग्रहण की जो प्रक्रियाएं हैं, उनका एक बड़ा भाग फेस टू फेस ही होगा, लेकिन फिजिकल मॉडल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व बगैर पेपर वाली प्रक्रियाओं के उपयोग से फिजिटल के रूप में तब्दील होता दिखेगा।
- कड़ी प्रतिस्पर्धा के दौर में भरोसा ही किसी बिजनेस का सबसे महत्वपूर्ण उत्प्रेरक होगा: जब जोखिम ज्यादा होगा, तब ज्यादा से ज्यादा ग्राहक खुद से यह जरूर पूछेंगे- क्या मैं इस ब्राण्ड पर भरोसा कर सकता हूं ? क्या वह जो कह रहे हैं, उस पर क्या मुझे भरोसा करना चाहिए ? क्या इस सेवा का उपयोग कर मैं जोखिम उठा रहा हूं ? चाहे वह कोई टैक्सी सर्विस हो, फैशन रिटेल आउटलेट या रेस्तरां डिलीवरी, बगल का मिठाई वाला हो, डायग्नोस्टिक सेंटर हो या फिर कोई और। हर बिजनेस को ग्राहकों के भरोसे के टेस्ट से गुजरना होगा। फिजिकल शॉपिंग के अनुभव को धक्का लगेगा और यह हाईजीन अैर सुरक्षापायों से जुड़ी चिंताओं से लड़ता रहेगा। यह व्यवसायों के लिए एक चेतावनी है कि वे अपने ग्राहकों के लिए एक सुविधाजनक और सुरक्षित माहौल तैयार कराएं। संगठनों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे न सिर्फ अपनी कहानी को सही ढंग से व्यक्त करें, बल्कि भरोसा पैदा करने वाले अपने एक्शन का भी प्रदर्शन करेंगे।
जाहिर है कि इस महामारी को लेकर ग्राहकों की जो प्रतिक्रिया होगी, वह पहले के मानदंडों से बिल्कुल अलग होगी। इसलिए संगठनों को ताजा ट्रेंडों पर नजर रखनी होगी और सतर्क बने रहना होगा। अपने ग्राहकों की कल्पना को समझने के लिए उन्हें ज्यादा सक्रिय और शीघ्र प्रतिक्रिया देना होगा। टेक्नोलॉजी न सिर्फ एक अदृश्य हाथ की तरह उपभोग को बढ़ाएगी, बल्कि व्यवसायों में जागरुकता प्रसारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ग्राहकों को विभिन्न माध्यमों का अनुभवों को मुहैया कराए जाने की काफी आवश्यकता है। सभी व्यवसाय, चाहे उनका आकार कितना ही बड़ा क्यों न हो, उन्हें अपने ग्राहकों और नियोक्ताओं को भरोसे और सुरक्षा का आश्वसान देना होगा, ताकि वे इस वर्तमान कोविड-19 के समय में अपने अस्तित्व की सुरक्षा कर सकें।
ऑथर- राकेश वाधवा,
चीफ मार्केटिंग एंड कस्टमर ऑफिसर
फ्यूचर जनरली इंडिया लाइफ इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

