उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव भी होंगे प्रभावित
यूपी में अस्तित्व बचाने में जुटी रालोद को मिली संजीवनी
सुनील शर्मा
न्यूज डेस्क। चुनाव में चौधरी अजित सिंह को हराकर उनसे बड़ी भूल हुई है। अब ऐसी गलती नहीं होगी। आज राजकीय इंटर काॅलेज में हुई महापंचायत में जुटी भारी भीड़ के बीच भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने यह बात कह जहां भाकियू और रालोद के बीच तीन दशक से चली आ रही राजनीतिक दूरी को मिटाने का प्रयास किया वहीं उत्तर प्रदेश में अपनी पहचान खोती जा रही रालोद को नयी संजीवनी मिल गयी है। गौरतलब है कि कभी जाट बिरादरी का नेतृत्व करने वाली राष्ट्रीय लोकदल उत्तर प्रदेश में अपना अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रही थी। ऐसे में जाट बेल्ट कहे जाने वाले वेस्ट यूपी में भारतीय किसान यूनियन का साथ मिल जाने से उसे जाट वोट बैंक फिर से अपने पाले में आने की उम्मीद जाग गयी है। वहीं भाजपा के खिलाफ प्रस्तावित महागठबंधन में भी रालोद को पहले के मुकाबले अच्छी स्थिति मिल सकती है।
कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे किसान आंदोलन में गुरूवार रात को गाजीपुर सीमा पर धरना दे रहे भाकियू नेता राकेश टिकैत के आंसू देखकर किसानों में आये उबाल के बाद भारतीय किसान यूनियन की ओर से महापंचायत का आह्वान किया गया था। राष्ट्रीय लोक दल ने न केवल महापंचायत को समर्थन दिया बल्कि चैधरी अजित सिंह के बेटे और पार्टी के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी भी महापंचायत में पहुंचे। बड़ी संख्या में उमडे़ किसानों के बीच महापंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि चुनाव में चौधरी अजित सिंह को हराकर हमने बड़ी भूल की। अब आने वाले चुनाव में किसान भाजपा को समर्थन नहीं देगा। इसके बाद मंच पर ही नरेश टिकैत और जयंत चौधरी गले भी मिले।
भाकियू के मुखिया महेंद्र सिंह टिकैत और रालोद के चौधरी अजित सिंह के बीच तकरार जगजाहिर थी। बागपत और मुजफ्फरनगर में अजित सिंह की हार का कारण भी भाकियू से रालोद की दूरी माना गया। जाट बेल्ट माने जाने वाली वेस्ट यूपी में भाकियू का दबदबा हर चुनाव को प्रभावित करता है। ऐसे में मुजफ्फरनगर में हुई महापंचायत में रालोद और भाकियू के बीच हुए मिलन का प्रभाव उत्तर प्रदेश की राजनीति पर अवश्य पड़ेगा। वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति में हशिये तक पहुंच गयी रालोद को भाकियू का साथ मिलने का मतलब संजीवनी मिल जाना है। क्योंकि जाट बाहुल्य क्षेत्र में भाकियू का साथ मिलने से उसका वोट बैंक काफी बढ़ जायेगा। वहीं आगामी चुनाव में भाजपा को परास्त करने के लिये राजनीतिक दलों के प्रस्तावित महागठबंधन में रालोद की स्थिति कोई बहुुत अच्छी नहीं थी। इस महागठबंधन में रहकर रालोद को अधिक सीटें मिलने की संभावना भी नहीं थी। मगर अब भाकियू का साथ मिलने से जहां उसका वोट बैंक बढ़ेगा वहीं महागठबंधन में भी उसकी स्थिति मजबूत होेगी और वह ज्यादा सीटों की दावेदारी कर सकते हैं। इस मिलन से उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव और 2022 के चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
पहले से तैैयार थी इस मिलन की नींव
अराजनीतिक भारतीय किसान यूनियन और रालोद के बीच हुए मिलन की नींव हालिया किसान आंदोलन नहीं है बल्कि इसकी शुरूआत काफी पहले ही रख दी गयी थी। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 2014 में रालोद के टिकट पर अमरोहा से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं। हाथरस जाते हुए जयंत चौधरी पर पुलिस द्वारा किये गये लाठीचार्ज का भाकियू ने जमकर विरोध किया था। वहीं गाजीपुर सीमा पर धरना दे रहे भावुक होकर रोने वाले राकेश टिकैत के पास अजित सिंह का फोन आया तो राकेश टिकैत ने ट्वीट करके कहा की, अजित सिंह ने साथ दिया। वह हमेशा साथ देते हैं। इसके बाद महापंचायत को समर्थन देकर खुद मंच पर पहंुचे जयंत चौधरी ने भाकियू से अपनी नजदीकियां जाहिर कर दीं।

