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Manipur Violence: मणिपुर सेना के हवाले, इंफाल में कर्फ्यू ; इंटरनेट पर वैन

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Manipur Violence: मणिपुर में हिंसा भड़क उठी है। इस बार हिंसा मणिपुर की राजधानी इंफाल में हुई। हिंसा की स्थिति को काबू करने के लिए सेना और पैरामिलिट्री फोर्स को मौके पर भेजा है। इस समय पूरा मणिपुर सेना के हवाले कर दिया गया है।
बताया जाता है कि न्यू चेकॉन इलाके में एक स्थानीय बाजार में जगह को लेकर विवाद हुआ। ये विवाद मैतई और कुकी समुदाय के बीच मारपीट को लेकर हुआ। मामला बढ़ गया, जिसके बाद आगजनी की घटना हुई। फिलहाल इलाके में कर्फ्यू लगा दिया गया है।

हिंसा में चर्च को किया आग के हवाले

भड़की हिंसा में एक चर्च में आग लगा दी गई। सेना मौके पर पहुंच गई है। स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। इंफाल में इससे पहले कुछ घरों को जला दिया गया था। स्थानीय लोगों के प्रदर्शन करने पर रोक लगाई है। मणिपुर में आगजनी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मणिपुर सरकार ने तत्काल प्रभाव से इंटरनेट और मोबाइल सर्विस को सस्पेंड कर दिया है। आदेश अगले पांच दिनों यानी 26 मई तक के लिए जारी किया गया है।

हेट स्पीच पर शिकंजे को इंटरनेट पर बैन

इंटरनेट सर्विस सस्पेंड करने का निर्णय सरकार ने लिया है। इस समय घरों और परिसरों को टारगेट किया जा रहा है। इंटरनेट पर तरह—तरह की वीडियो डाली जा रही हैंं। इससे और दूसरे इलाकों में हिंसा फैल रही है। अधिकारियों को डर है कि असामाजिक तत्व हेट स्पीच फैलाने, सार्वजनिक भावनाओं को भड़काने और हिंसा को जारी रखने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं।

पिछले कई महीने से अशांत है मणिपुर

पिछले एक महीने से अधिक समय से मणिपुर कई मुद्दों को लेकर अशांत है। शांति के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। इस महीने की शुरुआत में पहाड़ी राज्य में तब झड़पें हुई थीं, जब आदिवासियों ने अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में 3 मई को एकजुटता मार्च निकाला था। एक सप्ताह से अधिक समय से चली आ रही हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

हिंसा के बाद हजारों लोग बेघर


हिंसा में करोड़ों की संपत्ति नष्ट हुई है और हजारों लोग घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। सरकार की ओर से कैंप लगाए गए हैं। जहां लोगों ने रातें गुजारी। इसके अलावा आरक्षित वन भूमि से कूकी ग्रामीणों को बेदखल करने की खबरें सामने आईं। जिसके बाद तनाव बढ़ा और झड़पें शुरू हो गईं। इसके चलते कई छोटे-छोटे आंदोलन हो रहे हैं।

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