अमित बिश्नोई
मोदी जी बहुत विचलित और व्यथित हूँ. जबसे यूक्रेन में फंसे बच्चों की वीडियोज़ देखी हैं, उनमें उनकी सरकार से दर्दभरी पुकार देखी, उनकी बेबसी देखी है, इंडियन एम्बैसी की संवेदनहीनता और संवादहीनता की बातें सुनीं हैं, इन बच्चों के मुंह से इंडियन मीडिया के लिए फटकार सुनी है, मन बड़ा हताश और निराश है और सवाल कर रहा है कि क्या हम उसी देश में रहते हैं, क्या यह बच्चे उसी देश के नागरिक हैं जिसका सर्वोच्च नेता विश्वगुरु होने का दावा करता है. जिसकी पार्टी राम यानी भगवान को लाने का दावा करती है मगर इंसानों को लाने में असहाय दिख रही है, संवेदनशून्य दिख रही है. माफ़ कीजियेगा मोदी जी (Mr. Modi), आज मैं कुछ ज़्यादा ही बोल रहा हूँ।
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मोदी जी कुछ कीजिये और जल्दी कीजिये क्योंकि यूक्रेन (Russia-Ukraine war) में फंसे हज़ारों परिवारों के बच्चे वहां से जो वीडियोज़ भेज रहे हैं उससे हालात बहुत भयावह नज़र आ रहे हैं, इन वीडियोज़ में यह बच्चे जो जानकारियां दे रहे हैं वह बड़ी डरावनी हैं. यक़ीनन यह सारी वीडियोज़ आप तक भी ज़रूर पहुँच रही होंगी क्योंकि यह सबसे पहले भारत सरकार(Indian government) को यानि आपको भेजी गयी हैं और यह सारी वीडियोज़ किसी आईटी सेल की डॉक्टर्ड वीडियोज़ नहीं हैं, असली हैं, पीड़ादायक हैं और आपकी खुद की बनाई हुई छवि पर सीधा हमला कर रही हैं।

मोदी जी बच्चों की दर्द भरी पुकार से क्या आप विचलित नहीं होते। माना कि आप घोर अपरिवारवादी हैं, आपने खुद भी अपने परिवार का त्याग किया हुआ है मगर यह सारे बच्चे किसी परिवार का हिस्सा हैं, रोते-बिलखते माँ-बाप के जिगर का टुकड़ा हैं, यह इस देश के नागरिक हैं और सबसे बढ़कर यह आपके वोटर भी हैं जिन्हें आप सबसे ज़्यादा प्यार करते हैं. मोदी जी इन्हें अपनी अपरिवारवादी सोच की भेंट न चढ़ने दीजिये। यह समय चुनावजीवी बनने का नहीं बल्कि देश के ज़िम्मेदार लीडर बनने का है. यह समय देश वापस लौटे उन बच्चों से यह बताने का नहीं कि मोदी जी ने आपको बचाया है बल्कि इस बात का है कि इन बच्चों से अभी यूक्रेन के बंकरों में चार दिनों से क़ैद मेडिकल छात्रों के हालात जानने और उन्हें वहां से निकालने का है।
मोदी जी लखनऊ की एक बेटी का वीडियो भी आप तक पहुंचा ज़रूर होगा जिसमें वह कह रही है कि रूसी फौजी कई भारतीय लड़कियों को उठा ले गए जो किसी तरह पोलैंड और रोमानिया के बॉर्डर(Poland and Romania border) तक पहुँचने की कोशिश में बंकरों से बाहर निकली थीं. भगवान से प्रार्थना है कि वह बच्चियां सही सलामत हों. यह बच्चियां देश की अमानत भी हैं और इज़्ज़त भी. देश के इन अमानतों की बाइज़्ज़त सुरक्षित वापसी का कर्तव्य आपका ही है. बंकरों में फंसे यह छात्र सबूत और नाम के साथ बता रहे हैं कि दूतावास का कोई भी अधिकारी फ़ोन कॉल्स या मैसेज का जवाब नहीं दे रहा है।
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मोदी जी बताइये, रूसी सेना (Russian army) से पूरी तरह घिर चुके कीव शहर से यह बच्चे कैसे बंकरों से बाहर निकलें और कैसे पोलैंड या रोमानिया के बॉर्डर तक जांय जो वहां से सैकड़ों किलोमीटर दूर हैं. इनके पास कोई साधन नहीं, पैसे नहीं हैं और बॉर्डर पर किसी तरह पहुँच चुके छात्रों के साथ किस तरह कि बर्बरता हो रही है यह सब भी आपको वीडियोज़ में दिख ही रहा होगा। कैसे उनके साथ हिंसा हो रही है, कैसे वह बूट की ठोकरों से मारे जा रहे हैं, कैसे वह माइनस डिग्री टेम्प्रेचर में खुले आसमान के नीचे असहाय होकर अपने देश की ओर निगाहें टिकाये हुए हैं कि कब आएगी मदद।
जब यह बच्चे देश के आम लोगों से यह अपील करते हैं कि सरकार कुछ नहीं कर रही है, आप ही लोग कुछ कीजिये। धरना प्रदर्शन कीजिये, मोर्चे निकालिये, सरकार को जगाइए तब जाकर शायद हम लोगों की फ़रियाद सुनी जाएगी। जब यह बच्चे भारतीय मीडिया को झूठा बताते हैं और कहते हैं इनकी बात का विशवास मत कीजिये तब हर भारतीय का सर शर्म से झुक जाता है।
मोदी जी कितना अजीब लगता है कि एक युद्धरत देश में हज़ारों भारतीय बच्चे फंसे हैं और आप अपने बूथ वर्करों से चुनावी चर्चा (Election debate) कर रहे हैं। कैसे कर लेते हैं यह आप. मोदी जी माना कि युद्ध में फंसे लोगों को वहां से निकालने में समस्याएं आती हैं पर ऐसे समय पर ही तो आपकी परीक्षा होती है, आपकी कूटनीति का इम्तेहान होता है. जो समस्या भारतीय बच्चों के साथ है ऐसी समस्या किसी और देश के बच्चों के बारे में तो सुनाई नहीं दे रही. यह बच्चे बताते हैं कि अन्य देशों के सारे बच्चे वहां की सरकारों ने निकाल लिए, सिर्फ हमारी सरकार ही हमें यहाँ अकेला छोड़े हुए है।
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मोदी जी प्लीज़! आप तो भगवान को लाये हैं, इंसानों को भी ले आइये। वरना लोग इसे भी चुनावी जुमला ही कहेंगे। यह सारे छात्र वापस तो आंएगे ही लेकिन अगर इनमें चंद छात्रों के साथ भी कुछ अनहोनी हो गयी तो इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा और लोग भी।

