depo 25 bonus 25 to 5x Daftar SBOBET
Home आर्टिकल/इंटरव्यू एक और यू टर्न

एक और यू टर्न

0
42
another u turn

अमित बिश्नोई
रोज़ उठो, नहाओ, काला कानून बनाओ और यू टर्न मारो। बात तो कांग्रेस पार्टी की सही है, केंद्र की भाजपा सरकार वाकई में इस बात में माहिर है. पहले काला कानून बनाकर उसका तीर हवा में छोड़ती है और देखती है कि तीर कितनी दूर तक गया और किस जगह पर गिरा, गलत जगह पर गिरा और कुछ हलचल दिखी तो पहला जुमला, इस कानून को अभी लागू नहीं किया जायेगा, अभी तो इसपर मंत्रणा होगी, जिन लोगों की भलाई के लिए ये क़ानून आया है उनसे विचार विमर्श किया जायेगा। देश की ये पहली सरकार है जो कानून पहले बनाती है विचार विमर्श बाद में करती है। ऐसा ही एक कानून अभी हाल ही में हलचल में आया जिसे हिट एंड रन नाम दिया गया है। नाम के हिसाब से इसने काम भी किया, पहले देश के ड्राइवर समुदाय को हिट किया और जब पलट वार हुआ तो रन किया यानि भाग लिया।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने कल कहा कि साहब को रात में सपना आता और सुबह वो सपना कानून बन जाता है. तुगलकी फरमान शब्द की ईजाद शायद ऐसे ही आदेशों निर्देशों कानूनों से पड़ी होगी। दिल्ली से दौलताबाद अच्छी लगी तो उसे राजधानी बना दिया, गलती का एहसास हुआ तो वापस दिल्ली। हमारी सरकार भी तुगलकी फरमानों पर अमल कर रही है। फरमान जारी हुआ, हंगामा हुआ, चुनाव में नुक्सान दिखने लगा और फरमान वापस। पूरे देश के किसान डेढ़ साल तक दिल्ली की सीमाओं पर बैठे रहे, अपना घर बार, अपनी खेती बाड़ी छोड़, अपने बीवी बच्चों से दूर. मांग सिर्फ ये कि किसानों की भलाई के लिए जो कानून बनाये गए हैं वो सरकार वापस ले ले। किसानों को इतने अच्छे कानून हज़म नहीं होंगे। सरकार लगातार अड़ी रही, टस से मस होने का नाम तक नहीं। कैसे नहीं अपनाओगे इतने अच्छे कानून, आसानी से नहीं अपनाओगे तो ज़बरदस्ती अपना देंगे। किसान भी बड़े ढीठ निकले, पीछे हटने को तैयार नहीं। तम्बुओं की बिजली कट गयी परवाह नहीं, जेनरेटर मंगवा लिए. पानी काट दिया कोई फ़िक्र नहीं, टैंकर मंगवा लिए. क्या क्या नहीं हो गया सरकार और किसानों के बीच. दोनों पीछे हटने को तैयार नहीं, ये तो कम्बख्त उत्तर प्रदेश का चुनाव न आया होता तो किसानों पर इतने अच्छे कानून सरकार लादकर ही रहती। दरअसल चुनाव इस सरकार की दुखती रग है, इसपर जैसे ही कोई हाथ रखता है सरकार बिलबिला जाती है। किसानों की चुनाव में सबक सिखाने की धमकी काम आयी और सरकार ने यू टर्न ले लिया, इसी में भलाई भी थी क्योंकि पन्गा बड़ा मोटा था.

अब एकबार फिर सरकार ने पन्गा लिया और ये पन्गा भी काफी टेढ़ा साबित हुआ। ड्राइवरों ने दो ही दिन में सरकार को टेढ़ा कर दिया और सरकार को एकबार फिर यू टर्न लेना पड़ा और एक और कानून को फिलहाल ठंडे बस्ते में डालना पड़ा क्योंकि इसी महीने राम मंदिर का उद्घाटन होना है, मार्च अप्रैल में चुनाव होने हैं, ऐसे में देश की लाइफ लाइन व्यावसायिक परिवहन अगर ठप्प हो गया तो बहुत कुछ ठप्प हो सकता है, राजनीति भी. और राजनीति अगर ठप्प हो गयी तो फिर? बस इसी फिर वाले सवाल ने सरकार को ट्रक चालकों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। दो ही दिन में सरकार को दिन के तारे नज़र आ गए। पेट्रोल पंप खाली हो गए. कुछ की गाड़ियों के पेट्रोल टैंक फुल हो गए तो अधिकाँश ने सबकुछ ऊपर वाले की मर्ज़ी पर छोड़ दिया। रातों रात खाने पीने की ज़रुरत के चीज़ों के दाम आसमान पर पहुँच गए. 10 रूपये पाव वाला धनिया 20 रूपये में बिकने लगा. मैंने सब्ज़ी वाले से पूछा कि क्या धनिया भी पंजाब से आता है, बेचारा शर्मा गया.

ऐसे ही कुछ CAA / NRC के समय हुआ था. NRC पर पूरा आसाम जल उठा था, सरकार को भी एहसास हुआ कि ये दांव तो उल्टा पड़ गया. जिनके लिए इसे ज़बरदस्ती लागू किया गया उनसे कहीं ज़्यादा तो अपनों का नुक्सान होगा, परिणाम वही, ठंडा बस्ता। पूरे देश में CAA/NRC पर लोग सड़कों पर निकल आये। शाहीन बाग़ सज गया, पूरे देश में बहुत से शाहीन बाग़ बन गए। चार साल हो गए, मामला ठन्डे बस्ते में, हालाँकि इसे ठन्डे बस्ते से निकालने की फिर कोशिश हो रही है. कहने का मतलब ये है कि ये सरकार इस तरह के कानून बनाती ही क्यों है जिनपर यू टर्न लिया जाय. क्या बार बार अपने फैसलों पर यू टर्न मारना किसी भी सरकार के लिए अच्छा माना जा सकता है, शायद नहीं लेकिन इस सरकार को शायद इस तरह अपने पैर खींचने में कोई गुरेज़ नहीं है. इसकी तो सोच यही है कि चलो करके देखते हैं, दांव ठीक बैठा तो ठीक वर्ना ये कहकर पीछे हट जायेंगे कि हम तो भलाई करने निकले थे, अगर आपको अच्छा नहीं लगा तो कोई बात नहीं, ज़रूर हमारी तपस्या में ही कोई कमी रह गयी होगी। हिट एंड रन मामले में भी शायद ऐसा ही हुआ है।