चक्का जाम को लेकर वेस्ट यूपी में आशंकाओं का माहौल

उत्तर प्रदेशचक्का जाम को लेकर वेस्ट यूपी में आशंकाओं का माहौल

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चक्का जाम को लेकर वेस्ट यूपी में आशंकाओं का माहौल

शांतिपूर्ण चक्का जाम करने का दावा कर रहे किसान नेता
गणतंत्र दिवस पर हुई हिंसा के अनुभव कर रहे आशंकित

सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। कृषि कानूनों के विरोध में शनिवार को चक्का जाम के ऐलान के बाद आशंकाओं का माहौल बना हुआ है। किसानों ने भले ही सिर्फ तीन घंटे के देशव्यापी चक्का जाम का आह्वान करते हुए इसके शांतिपूर्ण संपन्न होने का दावा किया है। मगर गणतंत्र दिवस पर भी इसी प्रकार के दावों के बावजूद हुई हिंसा को लेकर आमजन में चिंता का माहौल है।

वहीं अब किसान आंदोलन में कूद पड़े राजनीतिक दल भी खुद को सबसे बड़ा किसान हितैषी साबित करने के प्रबल प्रयास में इस चक्का जाम में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे जिससे माहौल बिगड़ने का खतरा बना हुआ है। वहीं भाकियू नेता राकेश टिकैत का यूपी और उत्तराखंड को इस चक्का जाम से छूट देने और वहां के किसानों को दिल्ली कूच के लिये तैयार रहने के संदेश ने आशंकाओं को और बढ़ा दिया है।

केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों की ओर से शनिवार को देशव्यापी चक्काजाम को लेकर भय और आशंकाओं का माहौल है। किसान संगठनों ने वादा किया है कि शनिवार को होने वाला चक्का जाम पूरी तरह से शांतिपूर्ण रहेगा। देशव्यापी प्रदर्शन दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड में नहीं किये जाने की बात भी कही गयी है। लेेकिन पूर्व के कड़वे अनुभवों के आधार पर किसान नेताओं के दावों पर यकीन कर पाना आम जनता के लिये आसान नहीं है। गणतंत्र दिवस पर निकाले गये ट्रैक्टर मार्च से पहले भी किसान नेताओं ने इसी प्रकार के दावे किये थे और हिंसा हो जाने के बाद उपद्रवियों को किसान मानने से भी इंकार कर दिया था। ऐसे में शासन-प्रशासन सहित आम जनता का आशंकित होना स्वाभाविक है।

दूसरी ओर भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के आंसूओं को देखने के बाद किसानों में आये उबाल से आंदोलन फिर से खड़ा हो गया। इस मुद्दे के गरमा जाने के बाद राजनीतिक दलों की निगाह भी आंदोलन को समर्थन कर किसानों के वोट बैंक पर लगी हुई है। सपा जहां पहले से ही किसान आंदोलन के समर्थन में प्रदर्शन कर रही थी वहीं भाकियू नेता नरेश टिकैत से मिले समर्थन के बाद रालोद भी कमर कस कर मैदान में उतर चुकी है। कांग्रेस ने कल होने वाले चक्का जाम का समर्थन किया है। आप के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी यूपी चुनाव से पूर्व किसानों में पैंठ बनाने की चाहत रखते हैं और खुलकर किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं। ऐसे में किसान आंदोलन में राजनीतिक दलों की एंट्री माहौल को बिगाड़ भी सकती है जिसका खामियाजा आम जनता के साथ किसान आंदोलन को भी चुकाना पड़ सकता है।

वहीं भाकियू नेता और वर्तमान में किसान आंदोलन का चेहरा बन चुके राकेश टिकैत ने यूपी और उत्तराखंड में चक्का जाम टालने को लेकर कहा है कि इन जगहों के किसानों को कभी भी दिल्ली बुलाया जा सकता है। हालांकि राकेश टिकैत का भी दावा है कि सभी जगहों पर शांति बनी रहेगी और तय योजना के अनुसार कार्य किया जायेगा। लेकिन उनके दावे से यह आशंका भी बलवती हो रही है कि कहीं राकेश टिकैत का इरादा यूपी और उत्तराखंड के किसानों को दिल्ली बुलाना तो नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो उत्तराखंड से लेकर दिल्ली तक की सड़कें किसानों के ट्रैक्टर और वाहनों से भरी दिख सकती हैं। ऐसे में आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाये रखना असंभव नहीं तो मुश्किल जरूर होगा।

इन्हीं आशंकाओं के चलते वेस्ट यूपी में रहने वाले और रोजाना हाइवे पर सफर करने वाले लोगों में भय का माहौल है। उन्हें डर है कि कहीं गणतंत्र दिवस की तरह चक्का जाम में भी हिंसा न हो जाये। अनेक लोगों ने शनिवार को दिल्ली की ओर जाने का प्रोग्राम कैंसल कर दिया है। अब देखना होगा कि किसान नेताओं के दावों के मुताबिक कल होने वाला चक्का जाम शांतिपूर्वक निबटेगा या पहले की तरह किसान नेता बवाल होने पर सत्तारूढ पार्टी को ही जिम्मेदार ठहरायेंगे।

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