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अमित शाह की पीएम उम्मीदवारी!

आर्टिकल/इंटरव्यूअमित शाह की पीएम उम्मीदवारी!

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अमित बिश्नोई
पीएम पद की उम्मीदवारी की बात पर भाजपा में सिर्फ और सिर्फ एक ही नाम है और वो है नरेंद्र मोदी जी का. ये सवाल पहले भी उठता रहा है कि मोदी नहीं तो फिर कौन? भाजपा हमेशा कहती रही है कि इस पद पर सिर्फ मोदी जी हैं और कोई नहीं लेकिन, तिहाड़ से 50 दिनों बाद बाहर निकले आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने अपने पहले सार्वजनिक सम्बोधन में ये कहकर कि भाजपा अगर जीती तो प्रधानमंत्री मोदी नहीं अमित शाह बनेंगे और मोदी जी इस बार अपने लिए नहीं बल्कि अमित शाह के लिए वोट मांग रहे हैं, भाजपा के लिए एक ऐसा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की जैसा कि भाजपा अक्सर विपक्ष के लिए करती आ रही है. केजरीवाल ने पीएम पद के लिए अमित शाह का नाम उछालकर अमित शाह को सफाई देने पर बोलने पर मजबूर कर दिया, बिलकुल उसी तरह जैसे राहुल गाँधी ने अडानी-अम्बानी पर प्रधानमंत्री को बोलने पर मजबूर कर दिया। अमित शाह को तुरंत सामने आकर स्पष्ट करना पड़ा कि भाजपा में पीएम पद के लिए सिर्फ एक ही नाम है और वो है नरेंद्र मोदी का.

आम तौर पर विपक्षी नेताओं के आरोपों का भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इतना त्वरित जवाब कभी नहीं देता लेकिन पीएम पद और मोदी जी, एक ऐसा मुद्दा है जिसपर भाजपा में किसी और का नाम सामने आये ऐसा हो ही नहीं सकता। केजरीवाल ने अमित शाह का पीएम पद के लिए नाम उछालकर भाजपा के अंदर एक सन्देश देने की कोशिश की, सन्देश उन लोगों के लिए जो सिर्फ मोदी-मोदी सुन सुनकर, बोल बोलकर अंदर ही अंदर विचलित होने लगे हैं, ये सन्देश ऐसे नेताओं के लिए भी था जो दिन रात मेहनत करते हैं लेकिन नाम सिर्फ मोदी जी का होता है, ऐसे नेताओं की बहुत लम्बी फेहरिस्त है. लेकिन भाजपा के अंदर पिछले दस सालों में ऐसा माहौल हो गया है जहाँ किसी की कोई हैसियत नहीं रह गयी है. कोई आवाज़ नहीं उठा सकता। केजरीवाल ने शिवराज चौहान का उदाहरण दिया जिनकी मेहनत ने मध्य प्रदेश में एक समय हारा हुआ चुनाव पलट दिया और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज की लेकिन नतीजे में उन्हें क्या मिला, उन्हें राजनीतिक तौर पर हाशिये पर डाल दिया गया.

अमित शाह ने सफाई देने में शायद इसीलिए बहुत तेज़ी दिखाई और बताया कि ये सब विपक्ष की साज़िश है जो प्रधानमंत्री पद के लिए उनका नाम उछाला गया है, क्योंकि वो नहीं चाहते होंगे कि उनके प्रति प्रधानमंत्री के मन में कोई भी संशय पैदा हो । अमित शाह को अपने तेलंगाना के चुनावी दौर के बीच प्रेस कांफ्रेंस करके ये बताना पड़ा कि सिर्फ अगले पांच साल ही नहीं, अगले दस वर्षों तक प्रधानमंत्री पद के लिए भाजपा से सिर्फ एक ही नाम है और वो है नरेंद्र मोदी का। अमित शाह को कहना पड़ा कि 75 साल का नियम नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होता, और ऐसा कोई नियम भाजपा में नहीं है लेकिन ये सभी को मालूम है कि ये नियम मोदी जी के 2014 में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने का बाद ही लागू हुआ और इसी नियम के तहत अडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, सुमित्रा महाजन, यशवंत सिन्हा, येदियुरप्पा जैसे वरिष्ठ नेताओं को चुनावी राजनीती से दूर कर दिया गया और उन्हें मार्ग दर्शक मंडल में डाल दिया गया. अब जब बारी प्रधानमंत्री मोदी की आ रही है तो अमित शाह कह रहे हैं कि ये नियम नरेंद्र मोदी पर लागू नहीं होता।

अमित शाह भले पारी में नंबर दो की पोजीशन पर हैं लेकिन उन्हें अच्छी तरह मालूम है कि मोदी जी को पार्टी में किसी का भी नंबर एक पर नाम आना भी उन्हें पसंद नहीं। ऐसे हर नेता को उन्होंने हाशिये पर पहुंचा दिया जिन्होंने राजनीती में अपना एक मुकाम बनाया, केजरीवाल ने उन सभी नेताओं का नाम भी लिया जिसमें कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल हैं. ये पहली बार हो रहा है कि भाजपा विपक्षी नेताओं के बयानों के ट्रैप में फंस रही है. ताज़ा घटनाक्रम उसी का नतीजा है. केजरीवाल ने सिर्फ अमित शाह का नाम उछालकर भाजपा में खलबली मचाने की कोशिश नहीं की बल्कि ये कहकर कि अगला नंबर योगी आदित्यनाथ का है जिन्हें जीत मिलने के बाद ये लोग दो महीने में मुख्यमंत्री पद से हटा देंगे। केजरीवाल के इन शगूफों से भाजपा की इतनी त्वरित प्रतिक्रिया बताती है कि विपक्ष के राजनीतिक बयानों में भाजपा फंसती हुई नज़र आ रही है. ये सभी को मालूम है कि योगी आदित्यनाथ एक ऐसे हिन्दू ह्रदय सम्राट के रूप में उभरे हैं जो लोकप्रियता में कहीं न कहीं प्रधानमंत्री को टक्कर देते हुए नज़र आते है, मोदी जी के अलावा चुनावी सभाओं के लिए सबसे ज़्यादा डिमांड योगी आदित्यनाथ की रहती है. राजनीति के जानकर ये भी मानते हैं कि योगी और अमित शाह में आंकड़ा 36 का ही है, ऐसे में केजरीवाल का ये बयान कि अगला नंबर योगी का है, कहीं न कहीं योगी जी के मन में भी कोई संदेह पैदा कर सकता है. ये बात तब और भी मज़बूत लगने लगती है जब केजरीवाल वसुंधरा राजे, रमण सिंह, शिवराज चौहान और मनोहर लाल खट्टर का नाम लेते हैं जिन्हें पार्टी ने साइड लाइन कर रखा है. केजरीवाल के बयान को भले ही एक रानीतिक बयान कहा जाय लेकिन मुद्दा उन्होंने जो उठाया है उसमें तो बहुत दम है. आखिर 75 साल का नियम मोदी जी पर क्यों लागू नहीं होगा? विपक्ष भी तो यही कह रहा है कि मोदी जी वन नेशन वन लीडर का दौर लाना चाहते है ताकि तानाशाही का दौर चल सके.

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