इंटरनेशनल डेस्क – अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ताइवान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने ताइवान को 10 अरब डॉलर से अधिक के हथियारों की बिक्री की घोषणा की है। इस फैसले को चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और माना जा रहा है कि इससे चीन की नाराज़गी बढ़ेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ताइवान को लेकर बड़ा कदम उठाया है। अमेरिका ने ताइवान को 10 अरब डॉलर से अधिक के हथियारों की बिक्री की घोषणा की है। इस फैसले को चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और माना जा रहा है कि इससे चीन की नाराज़गी बढ़ेगी।
ताइवान को कौन-कौन से हथियार मिलेंगे?
इस हथियार पैकेज में कई आधुनिक हथियार शामिल हैं, जैसे—
82 HIMARS रॉकेट सिस्टम
420 ATACMS मिसाइलें
60 सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर
ड्रोन, जिनकी कीमत 1 अरब डॉलर से ज्यादा है
मिलिट्री सॉफ्टवेयर (1 अरब डॉलर से अधिक)
जेवलिन और TOW मिसाइलें (700 मिलियन डॉलर से ज्यादा)
हेलीकॉप्टर स्पेयर पार्ट्स (96 मिलियन डॉलर)
हार्पून मिसाइलों के रिफर्बिशमेंट किट (91 मिलियन डॉलर)
इनमें से कई हथियार वही हैं, जिन्हें पहले अमेरिका यूक्रेन को रूस के खिलाफ मदद के तौर पर दे चुका है।
क्यों अहम है यह सौदा?
अमेरिकी कानून के तहत, अमेरिका ताइवान को आत्मरक्षा में मदद करने का जिम्मेदार है। वहीं चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग की बात कह चुका है। चीन अक्सर ताइवान के पास बड़े सैन्य अभ्यास भी करता रहा है।
इस नए हथियार सौदे के बाद अमेरिका-चीन तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। यह फैसला ताइवान की सुरक्षा के साथ-साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की राजनीति पर भी असर डाल सकता है।

