लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्ता की लड़ाई से चार बार शासन करने वाली बसपा को लगभग बाहर माना जा रहा है। मुख्य लड़ाई में समाजवादी पार्टी और सत्तारुढ़ बीजेपी ही दिखाई दे रही हैं। लेकिन, बसपा ने टिकट देने के मामले में फिलहाल सभी दलों से बढ़त बना ली है। सत्ता की लड़ाई में सबसे आगे दिख रहीं सपा और भाजपा अभी तक इस मामले में बसपा के आसपास भी नहीं फटकती दिखाईं दे रहीं है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने दो महीने पहले से ही टिकट बंटवारे का काम शुरू कर दिया था। अभी तक बसपा ने सबसे ज्यादा सुरक्षित सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। दावा किया जा रहा है कि बसपा ने करीब 60 फीसदी टिकटों का वितरण कर दिया है। बाकी के भी टिकटों पर जल्द निर्णय ले लिया जाएगा। सूत्रों का दावा है कि 15 जनवरी को मायावती के जन्मदिन पर अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी।
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दोनों प्रमुख दल सहयोगियो को सहेजने में फंसे
समाजवादी पार्टी के साथ प्रसपा, सुभासपा, रालोद, जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट), अपना दल (कमेरावादी), महान दल समेत कई दल हैं। जबकि भाजपा के साथ निषाद पार्टी, अपना दल (सोनेलाल) प्रमुख रुप से हैं। सपा और भाजपा अभी तक अपने सहयोगी दलों के साथ सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं करने में जुटे हुए हैं। दोनों ही दल लगातार सहयोगी दलों के साथ बैठक पर बैठक कर रहे हैं। सबसे उहापोह की स्थिति भाजपा के सामने है। क्योंकि निषाद पार्टी भी नाराजगी जता चुकी है, वहीं अनुप्रिया पटेल भी नाराज बताईं जा रहीं हैं। दोनों ही दलों को उनके अनुरूप भाजपा टिकट देने के फिराक में दिखाई नहीं दे रही है। वहीं समाजवादी पार्टी की भी सहयोगी दलों के साथ बात फाइनल नहीं हो पाई है। लेकिन, नाराजगी जैसा माहौल नहीं दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस भी कर रहे सिर्फ दावे, हकीकत जीरो
कांग्रेस ने यूपी में इस बार 40 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की बात कही है। लेकिन, अभी तक उसने भी टिकटों का ऐलान नहीं किया है। हालांकि, प्रियंका गांधी लगातार दावा कर रहीं हैं कि करीब 100 सीटों पर प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं, उन्हें क्षेत्र में भेज दिया गया है लेकिन अभी तक ऑफिशियली इनकी घोषणा नहीं की गई है।
छोटे दलों ने भी मारी बाजी
यूपी में आम आदमी पार्टी, एआईएमआईएम, राजा भैया की जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) आदि ने भी अपने प्रत्याशियों के ऐलान कर दिए हैं। हालांकि इन दलों की यूपी में इस बार कोई विशेष चर्चा नहीं हो रही है। लेकिन देखा जाए तो प्रमुख दलों से टिकट देने की रणनीति में ये दल कोसों आगे निकल चुके हैं।
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पहले चरण के चुनाव में एक माह का वक्त
यूपी में पहले चरण का मतदान एक महीने का बचा है। 10 फरवरी को मतदान होना है। ऐसे में दावेदारों की धुकधुकी बढ़ी हुई है। क्योंकि टिकट मिलने के बाद उन्हें एक महीने से भी कम वक्त का समय मिलेगा। जबकि, कोरोना की परेशानियों के बीच रैली होना भी मुश्किल हो चुका है। प्रचार प्रसार की रणनीतियों को अंजाम देने में भी काफी वक्त लग सकता है।

