हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya 2022) स्वयं भगवान विष्णु का पर्व माना जाता है। इसे आखा तीज या चिरंजीवी तिथि भी कहा जाता है। हिंदू शास्त्रों के मुताबिक त्रेता युग और सतयुग का पदार्पण भी अक्षय तृतीया के दिन ही हुआ था। ज्योतिषियों का मानना है कि इस साल अक्षय तृतीया का मुहूर्त बेहद ही शुभ है। साथ ही इस बार ग्रहों के तीन विशेष योग लक्ष्मी योग, मातंग योग और शोभन योग भी बन रहे हैं।।पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान केंद्र के निदेशक व ज्योतिषाचार्य डॉ अनीस व्यास बताते हैं कि इस बार ग्रहों का विशेष संयोग होंगे। ये दिन इस बार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ये संयोग पूरे 50 साल बाद बन रहे हैं।। वही 30 साल बाद अक्षय तृतीया का पर्व शुभ योग में मनाया जाएगा। इस बार 3 मई 2022 को अक्षय तृतीया का पर्व आयोजित होगा। इस दिन मंगलवार और रोहिणी नक्षत्र होने से और भी शुभ योग बन रहे हैं।
शुभ कार्यों के लिए अबूझ महूर्त है अक्षय तृतीया
डॉ अनीस व्यास बताते हैं कि हिंदू धर्म में सभी शुभ कार्य महूर्त के अनुसार ही किए जाते हैं। किंतु अक्षय तृतीया ऐसा पर्व है जब शादी- विवाह, सगाई, गृह प्रवेश समेत सभी शुभ मांगलिक कार्य अबूझ मुहूर्त में किए जा सकते हैं। वह बताते हैं कि वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया शास्त्रों में बेहद शुभ मानी गई है। इस दिन बिना किसी शुभ मुहूर्त को देखे , विचार किये कार्य किए जाते हैं। शुभ कार्यों के लिए यह तिथि सर्वश्रेष्ठ मानी गई है वह बताते हैं कि इस साल दो ग्रह उच्च राशि में और दो ग्रह स्वराशि में विराजमान रहेंगे। अक्षय तृतीया पर इस बार मंगल-रोहिणी योग का संयोग होने जा रहा है। शोभन योग, तैतिल करण, वृषभ राशि के चंद्रमा के साथ इसका आयोजन होगा। ये विशेष योग पूरे पांच दशक बाद बन रहे हैं।
मिलता है अक्षय फ़ल
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अक्षय तृतीया पर किए जाने वाले स्नान दान तप जब होम ज्ञान का फल अक्षय होता है यानी जिसका क्षय नहीं हो सकता। इस दिन किए गए सभी पुण्य कार्य जन्मों-जन्मों तक आत्मा को शुद्ध रखते हैं। वह बताते हैं कि इस खरीदारी करना भी बेहद शुभ माना जाता है यह पितरों की तृप्ति का भी विशेष पर्व है इस दिन कुश और तिल के जल से पितरों का जल दान करने से उन्हें अनंत काल तक तृप्ति होती है।
स्नान का है विशेष महत्व
अक्षय तृतीया पर मंगल स्नान का भी अत्यंत महत्व है। माना जाता है कि इस दिन गंगा नहाने से मनुष्य को उसके सभी जाने-अनजाने पापों से मुक्ति मिलती है। ज्योतिष बताते हैं कि अगर गंगा स्नान संभव ना हो तो नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर नहाने से भी उत्तम फल की प्राप्ति होती है। इस दिन दान के रुप में घड़ी, कलश, पंखा, छाता, चावल, दाल,चीनी, फल, वस्त्र, सत्तू, ककड़ी, खरबूजा और दक्षिणा सहित ब्राह्मणों को दान करने से अक्षय पुण्य फल मिलता है। यह दिन कई मायनों में विशेष और सर्वश्रेष्ठ है। इस दिन भगवान ब्रह्मा जी के पुत्र की उत्पत्ति हुई थी। भगवान विष्णु नर- नारायण के रूप में अवतरित हुए थे। परशुराम भगवान का जन्म भी इसी दिन हुआ था। बद्रीनाथ जी के कपाट भी इसी दिन खुलते हैं। इसी तिथि से गौरी व्रत शुरू होता है।
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ये रहेगा शुभ महूर्त
3 मई 2022 को तृतीया तिथि सुबह 5:19 मिनट से शुरू होकर 4 मई की सुबह 7:33 मिनट तक रहेगी। इस दिन रोहिणी नक्षत्र सुबह 12:34 मिनट से 4 मई की सुबह 3:18 मिनट तक रहेगा। इस दिन विशेष तौर पर विष्णु और गणेश जी का पूजन करना चाहिए।

