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मेरठ सीट पर अखिलेश का मास्टर स्ट्रोक या डूबेगी नैया

आर्टिकल/इंटरव्यूमेरठ सीट पर अखिलेश का मास्टर स्ट्रोक या डूबेगी नैया

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सपा से सुनीता वर्मा के टिकट ने बढ़ाई राजनैतिक दलों की टेंशन

पारुल सिंघल
बीते दिनों मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी द्वारा लगातार बदले जा रहे प्रत्याशियों को लेकर अब बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषक इसे जहां अखिलेश का मास्टर स्ट्रोक बता रहे हैं, वहीं यह भी माना जा रहा है कि अन्य राजनीतिक दलों की टेंशन भी बढ़ गई है। चुनावी समीकरणों और आंकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि अखिलेश यादव ने अंतिम बॉल पर न केवल छक्का मारा है बल्कि विकेट लेने की भी तैयारी है।

दलित – मुस्लिम वोट पर निशाना

राजनैतिक विश्लेषकों के अनुसार समाजवादी पार्टी ने मेरठ हापुड़ लोकसभा सीट के साथ अन्य कई सीटों पर अपने प्रत्याशी अंतिम समय में बदले हैं। इसे सीधा-सीधा मास्टर स्ट्रोक कहा जा रहा है। यह माना जा रहा है कि जहां भाजपा राम नाम पर जीत हासिल करने की कोशिश कर रही है। वहीं, इससे नाराज मुस्लिम वर्ग और दलितों को समीकरण को साधने के लिए अखिलेश यादव ने रणनीति चली है। मेरठ की बात करें तो ऐसा माना जा रहा है समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी सुनीता वर्मा का मुस्लिम और दलित समाज में अच्छा होल्ड है। एक आंकलन के मुताबिक मेरठ में मुस्लिम समाज की तकरीबन 6 लाख वोट हैं। वहीं दलित समाज की भी तकरीबन साढ़े चार लाख वोट गिनती में हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि मेरठ में राम का किरदार निभाने वाले भाजपा के प्रत्याशी अरुण गोविल से मुस्लिम समाज खासा नाराज है। वहीं दलित समाज भी इस बार भाजपा के साथ जाने से इंकार कर रहा है। ऐसे में इन दोनों ही समाज को साधने का काम पूर्व विधायक रहे योगेश वर्मा और उनकी पत्नी सुनीता वर्मा बखूबी कर सकते हैं। यह भी माना जा रहा है कि अतुल प्रधान के साथ उनकी खुद की पार्टी में अंदरूनी कलह चल रही थी। पार्टी के सदस्य अतुल प्रधान का टिकट किए जाने से खासे नाराज थे। यह भी माना जा रहा है कि उनके अंदर दलित और मुस्लिम वर्ग की वोट इकट्ठे करने की कुव्वत नहीं थी। जिसे लेकर ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अंतिम पलों में नामांकन होने के बाद भी उनका टिकट रद्द कर दिया

बाहरी नहीं मेरठ के प्रत्याशी पर अधिक जोर
भाजपा द्वारा अरुण गोविल को मेरठ से टिकट दिए जाने पर भी मेरठ वासियों में काफी रोष है। एक तरफ जहां लोग मुद्दों और विकास की बात कर रहे हैं, वहीं दलित समाज, मुस्लिम समाज बाहरी प्रत्याशियों को वोट न देने की बात कर रहे हैं। सपा के टिकट बदले जाने का एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि सुनीता वर्मा पूर्व में मेयर रह चुकी हैं। मेरठ के विकास, लोगों की समस्याओं और मुद्दों को भली भांति जानती हैं। ऐसे में यहां के लोगों की समस्याओं को दूर करने में वह ज्यादा सक्षम साबित होंगी।

बसपा से दलित समाज का मोहभंग
बहुजन समाजवादी पार्टी यानी बसपा के बीते कुछ चुनावों में अत्यधिक सक्रियता ना दिखाने को भी दलित समाज द्वारा मोह भंग होने से देखा जा रहा है। समीकरण बनाए जा रहे हैं कि दलित समाज भी इस बार बसपा नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी को वोट देगा। यह भी माना जा रहा है कि बसपा ने भी मेरठ सीट पर बाहरी प्रत्याशी उतारा है। योगेश वर्मा की दलित समाज पर पकड़ भी अंतिम समय में टिकट बदले जाने की बड़ी वजह है। इस चुनावी समीकरण में समाजवादी पार्टी के इस मास्टर स्ट्रोक से बेशक अन्य राजनीतिक दलों के माथे पर शिकन की लकीरें साफ खींच रही हैं। बीते कुछ दिनों पहले पल्लवपुरम इलाके में भाजपा के विरोध को देखते हुए भी कयास लगाए जा रहे हैं कि समाजवादी पार्टी द्वारा सोची समझी रणनीति के तहत ही टिकट बदलने की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया है।

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