- किसान आंदोलन में शहीद किसानों की याद में मेरठ में स्मारक बनाने का ऐलान
- लखीमपुर खीरी हिंसा को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
मेरठ। किसान आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर लगातार निशाना साधते आयी सपा-रालोद की पहली रैली भी किसानों पर ही केंद्रित रही। यूपी सरकार द्वारा किसानों के साथ धोखा दियेे जाने की बातें कहने के साथ लखीमपुर खीरी हिंसा का जिक्र कर भाजपा को किसान विरोधी साबित करने की भी कोशिश रही। वहीं किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों की याद में मेरठ में स्मारक बनाने की भी घोषणा कर रैली में आये किसानों दिल जीतने का प्रयास किया गया।

Read also: मंदिर नहीं, महंगाई और किसान आंदोलन बनेगा यूपी चुनाव का मुद्दा
वेस्ट यूपी किसानों की भूमि है और यहां का किसान वोट बैंक किसी को भी सत्ता में बिठाने या सत्ता से बाहर करने की ताकत रखता है। किसान आंदोलन ने ही रालोद को वेस्ट यूपी में संजीवनी दी है। कृषि कानून से लेकर गन्ना भुगतान तक अनेक प्रकरणों को लेकर उत्तर प्रदेश का किसान भाजपा से नाराज दिखाई दे रहा है। ऐसे में जब सपा-रालोद गठबंधन की पहली रैली में किसानों का अथाह जनसमूह दिखाई दिया तो किसानों की ताकत को अपने पाले में खींचने में अखिलेश और जयंत ने जरा भी देर नहीं लगाई। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी का भाषण मुख्यतः किसानों पर ही केंद्रित रहा।

जयंत चौधरी ने किसान आंदोलन के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि किसानों की ताकत के आगे भाजपा को दाड़ी मुंडवानी पड़ी और नाक भी कटानी पड़ी। एक साल तक किसानों का अपमान करने का आरोप भाजपा पर लगाते हुए जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों का नेता कहलाने वाले किसी भाजपाई ने किसानों के हक में आवाज नहीं उठाई। जयंत ने कहा कि न्याय चाहने वाले किसान खुद ट्रैक्टर लेकर आये हैं। जयंत ने साफ इशारा किया कि रैली में किसानों की संख्या अधिक है यानि किसान भाजपा नहीं उनके साथ है। जयंत चौधरी ने किसान आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों की याद में मेरठ में स्मारक बनवाने का ऐलान कर उनकी भावनाओं को झिंझोड़ दिया।
Read also: असली योगी वही है जो दूसरों के दुख से दुखी हो
वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भी किसानों के मुद्दे उठाकर भाजपा सरकार पर निशाना साधते रहे। अखिलेश यादव ने अपने भाषण में कृृषि कानून लाकर किसानों को चित करने की भाजपा की साजिश बताया। उन्होंने एमएसपी पर ठोस फैसला करने की मांग करते हुए किसानों को उनका हक दिलाने का आश्वासन दिया। लखीमपुर हिंसा का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि मान छीना है तो मन बना लिया है। वहीं किसानों को खाद और गन्ना भुगतान न मिलने का मुद्दा उठाकर अखिलेश ने किसानों के दिल में जगह बनाने का प्रयास किया है।

निःसंदेह वेस्ट यूपी में चुनावी वैतरणी पार करने के लिये किसानों का सहारा मिलना बेहद जरूरी है। हालिया दिनों में भाजपा से दूर हो चले किसानो को अपने पाले में खींचने के लिये सपा-रालोद बेताब है। बात करें सपा-रालोद गठबंधन की पहली रैली की तो इसने सफलता के नये आयाम गढ़ दिये हैं। कम से कम अभी तो हम यह कह सकते हैं कि वेस्ट यूपी का किसान सपा-रालोद के साथ दिख रहा है। देखना होगा कि क्या भाजपा भी अपनी रैली में किसानों की इतनी भीड़ जुटा पाने में कामयाब हो सकेगी। क्योंकि किसानों के साथ के बिना सत्ता हासिल कर पाना तो भाजपा के लिये भी संभव नहीं है। यानि यह तय है कि इस बार का चुनाव किसानों पर ही केंद्रित रह सकता है और किसान वोट हासिल करने के लिये प्रत्येक दल हरसंभव प्रयास करेगा। देखना यह होगा कि अंतिम समय में किसान किसके साथ जाता है।

