अखिलेश-जयंत का साझा मंच राजनीतिक गठजोड़ का संकेत

आर्टिकल/इंटरव्यूअखिलेश-जयंत का साझा मंच राजनीतिक गठजोड़ का संकेत

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सुनील शर्मा

न्यूज डेस्क। यूपी विधानसभा चुनाव होने में लगभग एक साल का समय बाकी रह गया है। सत्तारूढ भाजपा सरकार के वर्तमान कार्यकाल के अंतिम वर्ष में उत्तर प्रदेश में राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। कहीं नये गठबंधन की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं तो कहीं पुराने संबंधों को फिर से तराशा जा रहा है।

मथुरा में सपा-रालोद की संयुक्त रैली में एक साथ मंच साझा कर सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी ने संकेत दे दिये हैं कि आने वाला विधानसभा चुनाव दोनों पार्टियां मिल कर लड़ने जा रही हैं। दोनों की राजनीतिक दलों के लिये यह गठबंधन कोई नया अनुभव भी नहीं होगा। क्योंकि सपा-रालोद एक साथ मिलकर पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं। तब सपा-रालोद के साथ बसपा और कांग्रेस भी महागठबंधन में शामिल हुई थी। हालांकि उस चुनाव में महागठबंधन को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा बहुमत से प्रदेश की सत्ता पर काबिज हुई। मगर वर्तमान में कृषि कानूनोें के विरोध में उतर आये किसानों के कंधों पर सवार होकर सपा-रालोद को सत्ता सिंहासन तक पहुंचने की राह दिखाई दे रही है।

2017 विधानसभा चुनाव में सपा- कांग्रेस और 2019 लोकसभा चुनाव में सपा-बीएसपी का गठबंधन दोनोें ही पार्टियों के लिये घाटे का सौदा साबित हुआ था। हाल ही में हुए बिहार चुनाव में भी महागठबंधन को करारी हार देखनी पड़ी। ऐसे में माना जा रहा था की यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक दल महागठबंधन बनाने की बजाये अलग-अलग चुनाव लड़ सकती हैं। मगर कृषि कानूनों के विरोध में उतरे किसानों ने राजनीतिक परिदृश्य बदल दिया। समाजवादी पार्टी ने जहां किसानों के समर्थन में आंदोलन किये तो रालोद को भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के समर्थन के बाद संजीवनी मिल गयी। ऐसे में चाहे भाकियू की महापंचायत हो या रालोद की जनसभा, समाजवादी पार्टी के नेताओं की मौजूदगी ने भविष्य में होने वाले गठबंधन के संकेत दे दिये थे।

उत्तर प्रदेश के बदले राजनीतिक परिदृश्य में आज मथुरा के बाजना इलाके में सपा-रालोद की संयुक्त सभा में राष्ट्रीय लोक दल के जयंत चौधरी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक साथ मंच साझा कर आगामी चुनावों में गठबंधन के संकेत दे दिये। दोनों ही नेताओं ने एक सुर में केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। कृषि कानून का विरोध में आयोजित जनसभा को सफल बनाने के लिये राष्ट्रीय लोक दल और समाजवादी पार्टी के नेताओं से लेकर कार्यकर्ता तक ने जी-जान लगा दी थी। संभावित गठबंधन की पहली परीक्षा में मिली सफलता के बाद जल्द ही दोनों दल गठबंधन का सार्वजनिक रूप से ऐलान कर सकते हैं।

वहीं अब तक कांग्रेस ने महागठबंधन को लेकर कोई राय जाहिर नहीं की है। मगर पार्टी की ओर से महागठबंधन में शामिल होने की संभावनाओं ने इंकार भी नहीं किया गया है। उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के खुलकर मैदान में उतरने और लोगों के मिल रहे समर्थन से ऊर्जावान कांग्रेस भी यदि सपा-रालोद के साथ खड़ी हो गयी तो भाजपा के लिये आने वाले चुनाव मुश्किलों भरे होंगे। जिसकी संभावनाएं अधिक दिख भी रही हैं।

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