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एग्रीविजन ने कृषि अधिनियम-2020 पर सामूहिक परिचर्चा के माध्यम से किसानों की आशंकाओं का किया समाधान

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एग्रीविजन ने कृषि अधिनियम-2020 पर सामूहिक परिचर्चा के माध्यम से किसानों की आशंकाओं का किया समाधान

हाल ही में पारित कृषि अधिनियमों को लेकर देश के कुछ राज्यों में किसानों के बीच मचे घमासान को देखते हुए कृषि क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन एग्रीविजन द्वारा एक राष्ट्रीय परिचर्चा आयोजित की गई. इस परिचर्चा में एशिया के नामचीन कृषि अर्थशास्त्री व पॉलिसी मामलों के विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को इस अधिनियम की बारीकियों के बारे में अवगत कराया गया तथा खुली चर्चा में उनकी आशंकाओं का समाधान भी प्रस्तुत किया गया. देश के जाने- माने कृषि मामलों के पॉलिसी विशेषज्ञ तथा दक्षिण एशिया इण्टरनेशनल फ़ूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट,नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ प्रमोद कुमार जोशी ने खेती को लाभदायक बनाने के लिए अनुकूल परिस्थितियों के निर्माण में इन अध्यादेशों की उपयोगिता के बारे में अपने 40 वर्षों के शोध एवं अनुभव के आधार पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया. उन्होंने किसानों की इन आशंकाओं को निराधार बताया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य को समाप्त कर देगी. उन्होंने कहा कि संसद ने पहले ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया हुआ है, ऐसे में एमएसपी को समाप्त किये जाने का प्रश्न ही नहीं उठता है. देश के सुप्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री तथा इण्टरनेशनल एग्री-बिज़नेस मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट, आनन्द, गुजरात में एग्री-बिज़नेस इकोनॉमिक्स एण्ड पॉलिसीज के विभागाध्यक्ष प्रो० आर एस पुण्डीर ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में इन अधिनियमों की भूमिका के बारे में अपने अनुभव साझा किये. उन्होंने बताया कि ये अधिनियम कृषि क्षेत्र में ढांचागत सुधार लाने की दिशा में बड़ा कदम है तथा इन अधिनियमों का भारतीय कृषि में दूरगामी परिणाम होने वाला है. इससे जहाँ एक ओर कृषि उत्पादों में मूल्य अस्थिरता स्वतः कम हो जाएगी वहीं कृषि व्यापर शब्द की व्यापकता बढ़ जाने से न सिर्फ किसान बल्कि उद्योग दोनों को आने वाले समय में लाभ प्राप्त होने से अर्थव्यवस्था पर अनुकूल प्रभाव पड़ना तय है.

समापन भाषण प्रस्तुत करते हुए एग्रीविजन के राष्ट्रीय प्रमुख सूरज भरद्वाज ने कृषि क्षेत्र में पारित किये गए इन तीनों अधिनियमों को देश के किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक क्रन्तिकारी कदम बताया. उन्होंने कुछ विपक्षी दलों विशेषकर कांग्रेस द्वारा किसानों को गुमराह किये जाने को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया तथा आह्वान किया कि सरकार के स्तर पर भी किसानों की आशंकाओं का उचित समाधान किया जाना नितान्त आवश्यक है.

इससे पूर्व परिचर्चा की शुरुआत में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में संयुक्त निदेशक बीज एवं प्रक्षेत्र तथा एग्रीविजन राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के सदस्य प्रो० प्रभाशंकर शुक्ल द्वारा एग्रीविजन के कार्य एवं उद्देश्य के बारे में अवगत कराया गया. उन्होंने अतिथियों का संक्षिप्त परिचय देते हुए सभी प्रतिभागियों का औपचारिक स्वागत भी किया. प्रो शुक्ल ने बताया कि एग्रीविजन अपनी स्थापना काल से ही भारत केंद्रित कृषि की बात करती आई है. किसान की समृद्धि के बिना देश के समृद्धि की कल्पना करना बेमानी है. एग्रीविजन इन्हीं उद्देश्यों को लेकर कृषि क्षेत्र में काम कर रही है.

राष्ट्रीय परिचर्चा में देश भर से जुड़े हुए प्रतिभागियों ने खुली चर्चा में भाग लेकर इन अधिनियमों के बारे में उपजी आशंकाओं से सम्बंधित प्रश्न भी पूंछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा उचित समाधान भी प्रस्तुत किया गया. खुली परिचर्चा सत्र का सञ्चालन आई आई टी रुड़की में कृषि-मौसम परियोजना वैज्ञानिक तथा एग्रीविजन राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् के सदस्य डॉ० अरविन्द श्रीवास्तव ने किया. इस राष्ट्रीय परिचर्चा सत्र का सञ्चालन भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक तथा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा परियोजना के राष्ट्रीय समन्वयक प्रो० प्रभात कुमार ने किया. परिचर्चा की रिपोर्टिंग डॉ अरविन्द श्रीवास्तव तथा डॉ अमित गोस्वामी ने किया. धन्यवाद ज्ञापन एग्रीविजन के राष्ट्रीय संयोजक गजेंद्र तोमर ने किया. कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिक प्रो० रघुराज किशोर तिवारी, प्रो० रमन त्रिवेदी, डॉ अमित विश्नोई, डॉ सुनील दुबे, डॉ परमेन्द्र सिंह, डॉ जयंत उत्तरवार, डॉ आलोक सिंह, डॉ सीता राम मिश्रा सहित देश के सभी प्रान्तों से बड़ी संख्या में कृषि विद्यार्थी, प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं किसान जुड़े रहे.

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