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कांग्रेस का विकल्प बनने को बुरी तरह से बेताब आम आदमी पार्टी की निगाहें इन दिनों गुजरात पर टिकी हुई हैं, आये दिन दिल्ली से आम आदमी पार्टी का कोई बड़ा नेता (हालाँकि केजरीवाल को छोड़कर वहां कोई बड़ा नेता नहीं है) गुजरात पहुँच रहा है और गुजरात मॉडल के सामने दिल्ली मॉडल को रख रहा है, इसी सिलसिले में आम आदमी पार्टी में दूसरे नंबर के नेता मनीष सिसोदिया आज गुजरात पहुंचे और भावनगर में एक सरकारी स्कूल का मुआयना भी किया, बाद में एक प्रेस कांफ्रेंस करके उन्होंने 27 वर्षों से राज्य में शासन कर रही भाजपा सरकार को बदहाल शैक्षिक ढांचे के लिए जमकर घेरा।
दरअसल मनीष सिसोदिया गुजरात यह जताने पहुंचे थे कि हमारे स्कूल तुम्हारे स्कूल से अच्छे हैं, यह स्कूल स्कूल वाली राजनीती आम आदमी पार्टी ने पंजाब में भी खेली थी जिसने काफी हद तक पंजाबियों को प्रभावित किया था, “आप” प्रचंड बहुमत से सरकार में आयी, अब वही दांव उसने हिमाचल और गुजरात में भी खेलने की तैयारी की है और इसकी शुरुआत काफी दिनों पहले हो चुकी है. सिसोदिया पहले भी गुजरात के शिक्षा मंत्री को दिल्ली आकर केजरीवाल सरकार के सरकारी स्कूल देखने की दावत दे चुके हैं, यह अलग बात है कि जीतूभाई वाघाणी ने आम आदमी पार्टी के इस न्योते को स्वीकार नहीं किया।
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अब मनीष सिसोदिया बिन बुलाये गुजरात के सरकारी स्कूलों का मुआयना करने पहुँच गए, मुआयना तो एक बहाना है मकसद तो गुजरात में सियासत चमकाना और “आप” कांग्रेस पार्टी का विकल्प सही विकल्प है इस बात को जताना है।
स्कूल के मुद्दे पर काफी पहले से आम आदमी पार्टी और गुजरात सरकार के बीच बहस का सिलसिला चल रहा है, गुजरात का शैक्षिक ढांचा तो वाकई चरमराया हुआ है, यह हकीकत है कि वहां के सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता है, जीतूभाई वाघाणी के ही विधानसभा में दिए गए एक बयान के अनुसार वहां के 13 हज़ार स्कूलों में एक भी कम्प्यूटर नहीं है जबकि 700 स्कूल ऐसे हैं जहाँ सिर्फ एक टीचर है.
ऐसे में सोच समझकर आम आदमी पार्टी ने इस मुद्दे को उभारा है क्योंकि वह जानती है कि यहाँ पर भाजपा सरकार काफी बैकफुट पर है।

