- द राॅयल प्रेसीडेंट सैलून से कानपुर पहुंचे राष्ट्रपति ने यह बात लोगों को संबोधन करते हुए कही
- 2019 से अपनी जमीन पर आने की सोच रहा था अब आ पाया हूं आप सबका आशीर्वाद लेने आया हूं
- प्रोटोकाल की वजह से आपलोगों से कुछ दूरी रही पर मेरी आपसे कभी दूरी नहीं रहेगी
राजशाही ठाठ का अहसास कराने वाली द राॅयल प्रेसीडेंट ट्रेन से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार शाम को कानपुर पहुंचे. उनका स्वागत राज्यपाल आनंदी बने पटेल और सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया. इससे पहले उनकी ट्रेन कानपुर देहात के झीझक में रुकी. यहां पर उन्होंने लोंगों को संबोधित किया. बोले मुझे इस स्टेशन का हर लम्हा याद है. जब सांसद था तो यहां बहुत सी ट्रेनें रुकती थी अब लोगों ने बताया कि ट्रेनें नहीं रुक रही. कोरोना के चलते ऐसा हुआ होगा. हमें पूरी उम्मीद है कि आने वाले समय ट्रेनों का ठहराव होगा. उन्होंने आगे कहा कि हमें आवेश में नहीं आने से बचना चाहिए. देखा गया है कि लोग धरना प्रदर्शन के चलते कई लोग ट्रेनें रोकते हैं लोगों को परेशानी होती है. आवेश में आकर आग तक लगा देते हैं. ये सब ठीक नहीं है. आपको हमेशा देश के विकास में योगदान देना चाहिए. न कि विकास कार्यों को रोकने में. मैं आप सबसे दूर नहीं है हां प्रोटोकाल होता है जिसकी वजह से कुछ दूरी हो जाती है लेकिन मेरी आपसे कभी दूरी नहीं रहेगी. आप अपनी शिकायतें मुझे भेज सकते हैं.
भतीजी नहीं मिल सकी
राष्ट्रपति से मिलने उनकी भतीजी अंजली पहुंची थीं. लेकिन राष्ट्रपति भवन से आई फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं था. इसलिए उन्हें अंदर एंट्री नहीं मिली. लेकिन उनकी भाभी और भतीजी हेमलता कोविंद स्टेज पर उनके पास मिलने पहुंचीं. इस दौरान उनके कुछ बचपन के भी दोस्त शामिल थे.
हमसे ज्यादा बचत तो टीचर की होती है
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि अपने भारत देश की बात करें तो राष्ट्रपति को सबसे ज्यादा तनख्वाह मिलती है. पांच लाख रुपए महीना लेकिन क्या आपको पता है कि पौने 3 लाख रुपए तो टैक्स में चला जाता है. तो बताइए भला कितनी बचत हुई. सबसे ज्यादा बचत तो टीचर की होती है. अब आप जान गए होंगे कि जितना बचता उससे ज्यादा तो हमारे अधिकारी और दूसरे लोगों को मिलता है. आप सामने जो टीचर्स बैठे हैं उन्हें तो सबसे ज्यादा मिलता है.

