लखनऊ : राष्ट्रपति महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का स्लोगन अपराध से घृणा करो, अपराधी से नहीं… इस स्लोगन को सांचे में ढालने के लिए उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक सीमित ने कैदियों की मनोदशा सुधारने और जरायम की दुनिया से दूर रखने के लिए जेल प्रशासन के समक्ष एक योजना प्रस्तुत की है। इस पर जेल प्रशासन ने अपनी सहमति देते हुए मुहर लगा दी है।
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दरअसल, जेल की चाहरदीवारी में अपने जुर्म की सजा काट रहे कैदियों की मनोदशा सुधारने के लिए उनकी कहानी और अनुभवों को एक किताब की शक्ल में पिरोया जाएगा। किताब को प्रकाशित करने के लिए कार्य योजना बनाई गई है। आमतौर पर जेल की सलाखों में कैद अपराधियों के प्रति आम लोग को सोच नकारात्मक होती है। जबकि कैदियों की एक तादाद ऐसी है। जिनका दोष सिद्ध नहीं हो सका और मुकदमें लंबित है। इन निरपराध कैदियों की सामाजिक छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए किताब को प्रकाशित किया जा रहा है। ताकि समाज इन्हे स्वीकार कर सके। हालांकि ये किताब उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति लखनऊ के चेयरमैन डॉ उमेश शर्मा के निर्देशन में जेल पर्यवेक्षक मयंक सिंह की अगुवाई में गाजीपुर की जिला जेल में प्रकाशित होगी। जेल पर्यवेक्षक मयंक सिंह का कहना है कि जेल में बंद कैदियों की दास्तां होती है। सामान्यता बोलचाल की भाषा में उसे लिखा जा सकता है। कैदियों का मन कुंठित न हो और उनकी मनोदशा को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश अपराध निरोधक समिति ने एक पहल की है। आगे चलकर तमाम जेलों में इसकी शुरुआत कराई जा सके।
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सीमित संसाधनों में बनाई समिति
बता दें कि कैदियों को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने के लिए श्रीमद्भागवत गीता की 11 प्रतियां ब्लू बुक पब्लिकेशंस की ओर से जेल प्रशासन को मुहैया कराई गई है। समिति चेयरमैन डॉ उमेश शर्मा के मुताबिक, उनकी समिति आने वाले कल में भी कैदियों के लिए कल्याणकारी सोच रखती है। इसके अलावा कैदियों की छवि सुधारने के लिए प्रयारत है। असल में सीमित संसाधानों के बीच गाजीपुर जिला जेल में बंद कैदियों के लिए समिति गठित की गई है। जिसकी रिपोर्ट राज्यपाल तक पहुंचती है। पहले भी समिति ने जेल का निरीक्षण कर चुकी है। कोविड की दूसरी लहर में सीमित ने जेल में सैनेटाइजर मशीन लगवाई थी।

